जयपुर, 06 अक्टूबर । शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी। इस बार सप्तमी तिथि की वृद्धि के कारण नवरात्र 10 दिन के होंगे और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ इसका समापन होगा। नवरात्र के दौरान ग्रह, वार और नक्षत्रों की स्थिति से कई शुभ संयोग बनने की बात ज्योतिषाचार्यों ने कही है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार घट स्थापना के दिन सूर्योदय के समय हस्त नक्षत्र के साथ शुक्ल योग रहेगा। गुरु और चंद्रमा की स्थिति एवं दृष्टि संबंध से केंद्र में गजकेसरी योग बनेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राजेश कुमार शर्मा के अनुसार नक्षत्र और योग का यह संयोग करीब 58 वर्ष बाद बन रहा है। उनके अनुसार यह समय व्यापारिक उन्नति, नए निवेश, अध्ययन और साधना के लिए शुभ माना गया है।
आमेर स्थित शीला माता मंदिर में 11 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे नवरात्र स्थापना होगी। भक्तों के लिए दोपहर एक बजे से दर्शन शुरू होंगे। 16 अक्टूबर को छठ का मेला भरेगा। 18 अक्टूबर को रात 10 बजे निशा पूजन होगा। 19 अक्टूबर को अष्टमी के दिन शाम 4:30 बजे पूर्णाहुति होगी। दोपहर 12:30 से शाम चार बजे तक मंदिर के पट मंगल रहेंगे।
नवरात्र के दौरान आमेर महल परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने हाथी सवारी अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। राजकीय संग्रहालय एवं महल आमेर के अधीक्षक राकेश छोलक की ओर से जारी आदेश के अनुसार 10 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक हाथी सवारी का संचालन नहीं होगा।
प्रशासन के अनुसार शिलामाता मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ जलेब चौक और आमेर महल परिसर में आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सुरक्षित और सुगम आवागमन के लिए यह व्यवस्था की गई है। हाथी सवारी बंद रहने के बावजूद आमेर महल पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। पर्यटक सुबह आठ बजे से शाम 5:30 बजे तक महल का भ्रमण कर सकेंगे। प्रवेश-पत्र वितरण की व्यवस्था सिंहपोल द्वार पर रहेगी।
दुर्गापुरा स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर में 11 अक्टूबर को सुबह सात बजे घट स्थापना होगी। मंदिर में माता को नवीन जरी की पोशाक धारण कराई जाएगी और पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर के महंत महेंद्र भट्टाचार्य के अनुसार 17 अक्टूबर को सप्तमी पर मेला और 19 अक्टूबर की रात हवन होगा।
राजापार्क स्थित वैष्णो देवी माता मंदिर में 11 अक्टूबर को अभिजित मुहूर्त में सुबह 11:51 से दोपहर 12:15 बजे तक घट स्थापना होगी। मंदिर के कमल असुदानी के अनुसार नवरात्र के दौरान माता को प्रतिदिन सात से नौ बार नई पोशाक धारण कराई जाएगी और विशेष श्रृंगार होगा।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा। 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र का शुभारंभ और महाराजा अग्रसेन जयंती होगी। इसी दिन श्री अग्रसेन जयंती उत्सव समिति की शोभायात्रा शाम चार बजे अग्रसेन भवन से रवाना होकर बांसावली मंदिर होते हुए बीएल स्कूल पहुंचेगी। टोंक रोड स्थित अमरूदों के बाग में शाम 6:15 बजे महाराजा अग्रसेन जयंती पर महाआरती होगी। 24 अक्टूबर को डांडिया महोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
12 अक्टूबर को सिंधी समाज की ओर से पूज्य झुलेलाल मंदिरों में असूचंद महोत्सव मनाया जाएगा। सुबह सात बजे से स्वामीजी का पूजन होगा।
16 अक्टूबर को सरस्वती आवाहन, 17 अक्टूबर को सरस्वती पूजन और तुला संक्रांति, 19 अक्टूबर को दुर्गाष्टमी व महानवमी और 20 अक्टूबर को विजयादशमी व दशहरा मनाया जाएगा। 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती और 29 अक्टूबर को करवा चौथ होगा। श्री कृष्ण बलराम मंदिर वृंदावन धाम में 26 अक्टूबर से कार्तिक मास की कथा और सत्संग शुरू होगा, जो एक माह तक चलेगा।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इस बार नवरात्र के दौरान शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहेंगे, जिससे शश राजयोग बनेगा। ज्योतिर्विद पं. दिनेश मिश्रा, मानसरोवर के अनुसार शनि के कुंभ राशि में रहते हुए नवरात्र में यह राजयोग करीब 30 वर्ष बाद बन रहा है। इसे साधना में स्थिरता और जनहित से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है।
नवरात्र की 10 दिन की अवधि में चार से पांच दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और दो दिन अमृत सिद्धि योग रहने की बात कही गई है। महाअष्टमी और महानवमी पर रवि योग का प्रभाव रहेगा। पंडित बनवारी लाल शर्मा के अनुसार नवरात्र में भूमि, भवन और वाहन की खरीदारी तथा गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे।
घट स्थापना के वार के आधार पर देवी के आगमन का वाहन निर्धारित होने की धार्मिक मान्यता है। इस बार रविवार को घट स्थापना होने से देवी के गज यानी हाथी पर आगमन की मान्यता है। इसे सुख, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है।
अक्टूबर में 16 अक्टूबर को बुध वृश्चिक राशि में अस्त होंगे। 17 अक्टूबर को सूर्य तुला राशि में प्रवेश करेंगे और तुला संक्रांति होगी। 24 अक्टूबर को बुध तुला राशि में उदित होंगे, जबकि 31 अक्टूबर को गुरु वक्री होकर सिंह राशि से कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।

