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सूडान सेना प्रमुख अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव को स्वीकार ….

सूडान सेना प्रमुख अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव को

सूडान सेना प्रमुख अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव को

सूडान में बवाल: युद्धविराम की शर्त पर अल-बुरहान का UN वीज़ा रोके जाने का आरोप   

UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने अल-बुरहान के वीज़ा जारी न होने पर खेद भी व्यक्त किया

नई दिल्ली, 27 सितंबर 2026: सूडान सेना प्रमुख अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव को दिए जाने का मामला अब बड़ा कूटनीतिक विवाद बन गया है। रॉयटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका द्वारा वीज़ा रोके जाने का संबंध सूडान में 90 दिन के प्रस्तावित युद्धविराम को स्वीकार करने के लिए अल-बुरहान पर दबाव से जोड़ा जा रहा है।

हालांकि, अमेरिकी सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह पुष्टि नहीं की है कि वीज़ा को युद्धविराम की शर्त से जोड़ा गया था। यही वजह है कि इस खबर में “रिपोर्टों के अनुसार” और “सूत्रों के मुताबिक” कहना महत्वपूर्ण है।

मामला शुरू कैसे हुआ?

अल-बुरहान को 81वीं UN General Assembly में हिस्सा लेने और भाषण देने के लिए न्यूयॉर्क जाना था। लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से कुछ दिन पहले तक उन्हें अमेरिकी प्रवेश वीज़ा नहीं मिला।

रॉयटर्स ने सूडानी और अन्य सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि अमेरिका ने वीज़ा को 90 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव से जोड़ दिया था। इस प्रस्ताव को अमेरिकी वरिष्ठ सलाहकार मासाद बोलोस आगे बढ़ा रहे थे। सूडानी सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में आपत्ति जताई थी।

AFP की रिपोर्ट में भी राजनयिक सूत्र के हवाले से कहा गया कि वीज़ा को तीन महीने के युद्धविराम को स्वीकार करने से जोड़ा गया था। हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने वीज़ा के सवाल पर सीधे टिप्पणी नहीं की।

सूडान ने UN से हस्तक्षेप की मांग रखी

सूडान के UN राजदूत अल-हारिथ इदरीस अल-हारिथ ने UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस को पत्र लिखकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। सूडान का तर्क था कि न्यूयॉर्क में UN मुख्यालय होने के कारण अमेरिका पर सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की UN गतिविधियों में भागीदारी को सुगम बनाने की जिम्मेदारी है।

UN महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि गुटेरेस इस बात को लेकर चिंतित थे कि अल-बुरहान को वीज़ा नहीं मिला है और UN Secretariat ने अमेरिका से उसके दायित्वों के अनुरूप वीज़ा जारी करने का आग्रह किया था।

25 सितंबर को गुटेरेस ने सूडान के विदेश मंत्री मोहिएद्दीन सालेम से मुलाकात के दौरान अल-बुरहान के वीज़ा जारी न होने पर खेद भी व्यक्त किया।

अमेरिका की दलील क्या है?

यहां मामला और पेचीदा हो जाता है जब अमेरिकी विदेश विभाग ने वीज़ा विवाद पर सीधे सफाई देने के बजाय सूडान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर सवाल उठाया। प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि न तो सूडानी सेना और न ही RSF तथा उनके नेता सूडान में “legitimate, constitutional governance” का प्रतिनिधित्व करते हैं।

अमेरिका ने यह भी कहा कि वह संघर्ष जारी रखने वाले सभी पक्षों और युद्ध को आर्थिक या सैन्य समर्थन देने वाले नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने की कोशिश करेगा। यानी वॉशिंगटन का रुख सिर्फ युद्धविराम कराने तक सीमित नहीं है; अमेरिका सूडान में जारी सत्ता और सैन्य संघर्ष के दोनों प्रमुख पक्षों पर दबाव बनाने की बात कर रहा है।

अल-बुरहान ने क्या जवाब दिया?

26 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें अमेरिका का वीज़ा नहीं चाहिए और वह ऐसी शर्तों के आगे नहीं झुकेंगे जिन्हें सूडान के लिए नुकसानदेह माना जा रहा है।

अल-बुरहान लंबे समय से ऐसे बाहरी युद्धविराम प्रस्तावों का विरोध करते रहे हैं जिन्हें वे सूडानी सेना और Rapid Support Forces (RSF) के बीच शक्ति-संतुलन को प्रभावित करने वाला मानते हैं।

सूडानी सरकार का तर्क है कि पिछली युद्धविराम व्यवस्थाओं का इस्तेमाल RSF ने अपनी सैन्य स्थिति मजबूत करने के लिए किया।

सूडान में युद्ध किसके बीच है?

सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और अर्धसैनिक संगठन RSF के बीच युद्ध चल रहा है। एक तरफ अल-बुरहान के नेतृत्व वाली Sudanese Armed Forces (SAF) है, जबकि दूसरी तरफ RSF के कमांडर मोहम्मद हमदान दगालो, जिन्हें आम तौर पर “हेमेदती” कहा जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि अल-बुरहान और हेमेदती कभी एक ही सत्ता व्यवस्था का हिस्सा थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच सत्ता संघर्ष खुली लड़ाई में बदल गया।

इस युद्ध ने सूडान को दुनिया के सबसे गंभीर मानवीय संकटों में पहुंचा दिया है। लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और खाद्य संकट तथा मानवीय सहायता की जरूरत लगातार बढ़ी है। UN के अनुसार, हालिया संघर्ष ने बड़े पैमाने पर भुखमरी और विस्थापन को जन्म दिया है।

क्या अमेरिका सचमुच वीज़ा को युद्धविराम से जोड़ रहा था?

यही इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील सवाल है।

रॉयटर्स और AFP के राजनयिक/सूडानी सूत्रों ने वीज़ा और 90-दिन के युद्धविराम के बीच संबंध की बात कही है। लेकिन अमेरिकी सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि उसने वीज़ा इसलिए रोका क्योंकि अल-बुरहान ने युद्धविराम स्वीकार नहीं किया।

इसलिए अभी इसे एक reported linkage के रूप में ही प्रस्तुत करना अधिक तथ्यात्मक होगा, न कि अमेरिकी सरकार द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकार की गई नीति के रूप में।

UN Agreement को लेकर विवाद क्यों?

यही मुद्दा इस विवाद को और बड़ा बना रहा है।

UN Headquarters Agreement के तहत अमेरिका को UN में सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की आवाजाही में अनावश्यक बाधा नहीं डालने की जिम्मेदारी है। AFP ने इसी आधार पर रिपोर्ट किया कि राजनयिक सूत्रों ने वीज़ा रोकने को समझौते का संभावित उल्लंघन बताया।

UN महासचिव की ओर से भी अमेरिका से अपने दायित्वों के अनुरूप वीज़ा जारी करने का आग्रह किया गया था।

लेकिन दूसरी तरफ अमेरिका यह सवाल उठा रहा है कि अल-बुरहान और RSF नेतृत्व में से कोई भी सूडान के लिए संवैधानिक और वैध शासन का प्रतिनिधित्व नहीं करता।

यानी विवाद में UN में भाग लेने के अधिकार, अमेरिकी आव्रजन अधिकार और सूडान की राजनीतिक वैधता—तीनों मुद्दे आपस में जुड़ गए हैं।

अल-बुरहान नहीं पहुंचे तो UN में कौन आया?

अल-बुरहान की अनुपस्थिति में सूडान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मोहिएद्दीन सालेम ने किया। सूडानी अधिकारियों ने इसके बावजूद UN के साथ मानवीय सहायता और राजनीतिक संवाद जारी रखने की बात कही। सूडानी राजदूत के अनुसार, वीज़ा विवाद ने न्यूयॉर्क में अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित कुछ बातचीत को भी प्रभावित किया।

अमेरिका का उद्देश्य क्या बताया जा रहा है?

26 सितंबर की रिपोर्ट में The National ने अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार मासाद बोलोस के हवाले से बताया कि वॉशिंगटन सूडान में लड़ाई रोकने के लिए प्रतिबंधों और हथियार प्रतिबंध जैसे उपायों का इस्तेमाल करना चाहता है। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका अब सूडान के युद्ध में सिर्फ मध्यस्थ की भूमिका निभाने के बजाय दोनों युद्धरत पक्षों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल बाकी है

अगर किसी UN सदस्य देश के नेता को UN General Assembly में आने का वीज़ा किसी राजनीतिक शर्त से जोड़ा जाता है, तो सवाल उठता है: क्या UN में भागीदारी को किसी देश की विदेश नीति या युद्धविराम स्वीकार करने के लिए दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए?

सूडानी पक्ष इसे राजनीतिक दबाव और UN व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है, जबकि अमेरिकी नीति का घोषित उद्देश्य युद्ध को रोकने के लिए सभी युद्धरत पक्षों पर दबाव बढ़ाना है। इन दोनों दावों के बीच वास्तविक विवाद अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

सूडान का यह विवाद अब केवल “अल-बुरहान को अमेरिकी वीज़ा मिला या नहीं” तक सीमित नहीं है। इसके तीन बड़े आयाम हैं—90 दिन का युद्धविराम, अमेरिका का सूडान पर बढ़ता दबाव और UN Headquarters Agreement के तहत सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की पहुंच का सवाल।

अल-बुरहान ने अमेरिकी दबाव के सामने झुकने से इनकार किया है, जबकि वॉशिंगटन युद्ध समाप्त कराने के लिए दबाव बढ़ाने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। इस बीच UN महासचिव ने भी अल-बुरहान को वीज़ा नहीं दिए जाने पर खेद जताया है। source: sudan tribune

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