दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंज़िला PG की इमारत भरभराकर गिर गई…लेकिन जो सवाल खड़े करके गई है उनसे आपको जुड़ना आपके लिए बहुत ज़रूरी है. इस हादसे के पीछे का सच जो छुपा हुआ था सामने आ रहा है .
हालांकि ऐसी या इस जैसी 199 इमारतें सत्यनिकेतन में अभी और खड़ी हैं. आठ मृतकों और उनके घर वालों के अरमान और उम्मीदें बिल्डिंग के मलबे में दफन हो गईं ….PG में रह रहे कुछ छात्रों के मां-बाप और रिश्तेदार अपने बच्चों की तस्वीरें लेकर अस्पताल और घटनास्थल के लगा रहे हैं चक्कर। मगर उनको अपने लाडले की कोई खबर नहीं वो आखिर ज़िंदा या मुर्दा कहाँ मिलेंगे ?
आप और हम ये सवाल करते रहें कि इमारत क्यों गिरी? इसके लिए किसको ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा? मरने वालों को मुआवज़ा कब और कितना मिलेगा ? वग़ैरा वग़ैरा ….ये सवाल कुछ दिन मोबाइल्स और TV SCREENS पर घूमकर रुक जायेंगे लेकिन रुकते वक़्त इन सवालों की सुई हमारी सरकारी वेवस्था की तरफ ही आकर गिरेगी ! इस सुई का रुख मोड़ा जाएगा मगर क़ानून और वेवस्था की टूट चुकी कमर ढीली सुई की तरह लटक कर फिर नीचे ही आन पड़ेगी .
इमारत कमज़ोर थी, तो छात्रों के रहते हुए इस अवैध बिल्डिंग के Basement में भवन की Maintenance और निर्माण कार्य कैसे चल रहा था ? यह सवाल अब पुराना हो गया ,,,,अब सवाल यह है कि सिर्फ 25 क़दम की दूरी पर MCD का कार्यालय है. सर्कार कि प आर्टि के विधायक १०० क़दम पर रहते हैं इसके बावजूद Corporation की नाक के नीचे अवैध PG कैसे चल रहा था ?
न खाऊंगा न खाने दूंगा वाले साहिब की पार्टी की मुख्यमंत्री, उनकी सांसद ,उनकी MCD, उनके ही विधायक के क्षेत्र में सभी खाते पीते दिखाई दे रहे हैं. इसमें कोई हर्ज भी नहीं है मगर छात्रों से लाखों वसूलने वाले PG मालिक छात्रों कि ज़िंदगियों से खेल रहे हैं अब किसी से छुपा नहीं है.
DU के अकेले साउथ कैंपस में 7 COLLEGES में 22000 STUDENTS में से लगभग आधे छात्र दिल्ली के बाहर के पढ़ते हैं. सिर्फ 2 COLLEGES VENKATESHWAR और METRAYI COLLEGE में हॉस्टल की सहूलत है और उसमें भी सिर्फ 202 BEDS की AVAILIBILITY है .
DU में कुल 90 से ज़्यादा COLLEGES हैं, और इनमें कुल 4 लाख से अधिक रेगुलर छात्र पढ़ते हैं, जिनमें (लगभग 60% यानी ढाई लाख ) छात्र दिल्ली से बाहर के होते और सिर्फ 20 COLLEGES में ही HOSTEL की सुविधा है. सरकारी UNIVERSITIRS में इसलिए पढ़ने भेजा जाता है की वहां रहने खाने की सुविधा होगी और SOCIAL SECURITY भी, लेकिन हाल इतना बुरा है कि सालाना डेढ़ से दो लाख खर्चने के बाद भी जान माल की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह में छात्रों को संबोधित करने पहुंचे थे और विपक्ष पर ‘दिमागी नक्सल’ तथा ‘नाराज फूफा’ जैसे तंज कसे और चले गये। पार्टी की विचारधारा के कुछ साफ़ सुथरे कपड़ों वाले छात्रों को सभागार में आने की इजाज़त दी गई.
बस एक चुनावी रैली की तरह छात्रों के इस ग्रुप को सम्बोधित किया और रवाना. कुछ ही दिनों बाद DUSU के चुनाव होने हैं यानी यहाँ भी सत्ता की खेती के लिए NURSURY तैयार करने के आये थे प्रधानमंत्री जी .
छात्रों के बुनियादी मुद्दों से न तो PM को ,न किसी CM, या नेता को चिंता है. क्या UGC कोई ऐसी योजना बना रही है जहाँ छात्रों को सस्ती तालीम, HOSTEL और उनके स्वस्थ का ख्याल रखा जाता हो ? जिस तरह सरकारी स्कूलों, COLLEGES और UNIVERSITIES को साम्प्रदायिकता के अड्डे बनाया गया है इसके क्या नतीजे निकलेंगे आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं. SCHOOL और COLLEGES के छात्रों को भी वोट, सियासत और सत्ता का टूल बनाकर रखा हुआ है, जबकि छात्रों को देश कि धरोहर के रूप में देखा जाना चाहिए था.
आप खुश होरहे होंगे कि 5 अफसरों को SUSPEND कर दिया गया तो सारी वेवस्था चकाचक हो जाएगी ऐसा हरगिज़ नहीं है , इससे पहले भी सैकड़ों अफसरों को ससपेंड किया जा चूका है SIT बनी हैं लेकिन हादसे और घोटाले कई गुना बढ़ गए हैं … कितनो का सस्पेंशन चल रहा है और कितने बहाल हो चुके हैं इसका कोई डाटा AVAILABLE नहीं है .
अब आपको समझ जाना चाहिए, बड़े हादसों के बाद कुछ अफसरों के SUSPENSIONS सिर्फ DAMAGE CONTROL की HEADLINE तक सीमित होता है ….सरकार किसी भी पार्टी की हो SYSTEM वही रहता है
आपको बतादें , दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस इलाक़े से सटे “सत्य निकेतन में 200 से ज्यादा PG चल रहे हैं। उनमें से एक PG की इमारत गिरने से आठ लोगों की जान चली गई, इसके बाद हाई कोर्ट ने पूरे दिल्ली के PG और hostels की जांच का आदेश दिया है।
वैसे सत्तरूढ़ पार्टी ने अदालतों और दूसरी Agencies को सांप्रदायिक मुद्दों जैसे मस्जिद, मदरसा, क़ब्रस्तान, अज़ान, मुस्लमान और किसान के खिलाफ PILs की सुनवाई में और विपक्ष के नेताओं पर मुक़द्दमे चलाने में इतना व्यस्त कर दिया गया है की अदालतों के पास जनहित, राष्टहित और विकास के कामों से मुताल्लिक़ मुद्दों पर SUO MOTO COGNIZANCE यानी स्वतः संज्ञान लेने का वक़्त ही नहीं है.
अब आते हैं असली सवाल पर—PG मालिक हरिराम बंसल, उसकी पत्नी उर्मिला बंसल और बेटा महेश बंसल गिरफ्तार किए गए हैं। हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की judicial custody, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है । MCD के 5 अधिकारी suspend किए जा चुके हैं। इनमें South Zone के Deputy Commissioner और भवन विभाग से जुड़े इंजीनियर भी शामिल हैं।
27 घंटे चला rescue operation के बाद इस बात का इंतज़ार था कि 50 से ज़्यादा छात्रों वाले PG की बिल्डिंग के ध्वस्त होने के बाद मृतकों और घायलों का आधिकारिक आंकड़ों का सच सामने आएगा. घायलों को AIIMS के अलावा किन अस्पतालों में पहुंचाया गया था, तो किस अस्पताल में घायलों और मृतकों का अंतिम आंकड़ा किया है ?
इसकी जानकारी के लिए हमने साउथ कैंपस के SHO से जानकारी लेना चाही किन्तु उनकी तरफ से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई।बल्कि कोई response ही नहीं दिया गया.
इस पूरे प्रकरण का नतीजा भी वही होगा जो करोल बाग़ में RAO IAS COACHING के BASEMNT में पानी भर जाने से डूबने वाले तीन छात्रों की मौत के बाद हुआ ..2 साल बाद cbi ने उस अधिकारी को CLEAN CHIT देदी जिसको ससपेंड करने की HEADLINE बनाई गई थी. याद रखें PG चलाने वाले लोग तनहा नहीं हैं उनकी बड़ी लॉबी है, बड़े बड़े नेताओं की छत्रछाया है और कई PG खुद बड़े नेताओं के ही चल रहे हैं.
लेकिन…दिल्ली हाई कोर्ट के जजों ने अपने मौखिक बयान में कहा कि जिम्मेदारी केवल उस इमारत के मालिक की नहीं है। MCD और Delhi University की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
क्या यह सिर्फ एक इमारत की कहानी है? या मुद्दा भ्रष्टाचार और रिशवत का है? बस यहीं से मामला और गंभीर हो जाता है। और बात सीधे पहुँचती है दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय तक…..क्योंकि रिश्वत के खेल में कोई एक अधिकारी या विभाग शामिल नहीं होता बल्कि पूरा सिस्टम लिप्त होता है. Building निर्माण के वक़्त नियम लागू नहीं होते तो घनी आबादियों के बस जाने के बाद इमारतों पर नियम लागू कराने की बात एकदम फ़र्ज़ी लगती है.
2022 में भी सत्य निकेतन में एक इमारत मरम्मत के दौरान गिर चुकी है और उसमें दो मजदूरों की मौत हुई थी। जो एक चेतावनी थी, उस वक़्त दिल्ली में AAP की सरकार थी, लेकिन क्या शासन और प्रशासन ने उस चेतावनी से कोई सबक लिया? अगर लिया होता तो आज फिर उसी इलाक़े में मासूम छात्रों की मौतों का यह खौफनाक मंज़र देखने को न मिलता. मगर मोह माया का जिन्न जो खोपड़ियों में बैठा हुआ है वो कभी भी बाहर आजाता है, और तबाही लाता है.
हमारी व्यवस्था हमेशा हादसों के बाद ही क्यों जागती है? सवाल है Governance का ……
दिल्ली में BJP सरकार है। MCD पर भी BJP का नियंत्रण है। केंद्र में BJP की सरकार है, क्षेत्र की सांसद और लोकल MLA भी बीजेपी के हैं, तो क्या सिर्फ यह कह देना काफी होगा कि—“मालिक दोषी है, अधिकारी निलंबित कर दिए गए हैं और जांच बैठा दी गई”? अब यह जांच बैठकर उठती ही नहीं है बैठी ही रहती है….
Good Governance का मतलब सिर्फ हादसे के बाद FIR और अधिकारीयों का suspension नहीं है। Good Governance का मतलब है, हादसा होने से पहले खतरे को पहचानना। कोई हादसा अगर सरकारी ढील या लापरवाही की वजह से हो जाए तो आइंदा इसको न होने देना.
अगर राजधानी में हज़ारों छात्र PG और private hostels में रह रहे हैं, तो सरकार और College प्रशासन के पास यह जानने की व्यवस्था बल्कि Programme होना चाहिए कि—कौन-सी इमारत कितनी पुरानी है? और वहां रह रहे College के बच्चों की सुरक्षा का क्या प्रबंध हैं. क्योंकि Parents ने Admission तो कॉलेज में कराया है और PG या प्राइवेट रूम तो बच्चों को मजबूरी में दिलाया जाता है.
और यह ज़िम्मेदारी भी Colledge प्रशासन और City Administration की ही होनी चाहिए जहाँ बच्चे पढ़ाई के दौरान रह रहे हैं उस इमारत में कितने लोग रह रहे हैं? और कितने लोगों के रहने की उस ईमारत में गुंजाईश है ? इमारत में अतिरिक्त मंज़िलें क्या Corporation की इजाज़त के बाद बनी हैं? कहां basement में construction चल रहा है? कहां structural safety Measures नहीं लिए गए है? और कौन कौन सी इमारतें पहले से खतरनाक घोषित की जा चुकी है?
दिल्ली के “चार इंजन” की सरकार का दावा, सरकार चाहे तो इसे राजनीतिक आरोप माने। लेकिन जनता का सवाल राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक है। और हम जनता के प्रतिनिधि के तौर पर ही अपने विचार रखते हैं. अगर सरकार के अलग-अलग स्तरों पर एक ही पार्टी का प्रभाव है, तो फिर जिम्मेदारी भी उतनी ही स्पष्ट होनी चाहिए।
यानी जिस पार्टी का राज है तो किसी भी हादसे के लिए वही पार्टी ही ज़िम्मेदार भी है. अगर तनिक भी मानवता और शर्म है तो ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को खुद से इस्तीफ़ा देदेना चाहिए?” अब जनता क्या क्या मांगे राशन मांगे इन्साफ मांगे बिजली मांगे पानी मांगे शिक्षा मांगे स्वास्थ खाद मांगे बिजली मांगे और फिर नेताओं से इस्तीफे भी मांगे ,, बस मांगने की ही लाइन में लगी रहे जनता ……यह तो सही नहीं है…
लेकिन यहां एक संतुलन रखना भी ज़रूरी है, सिर्फ BJP की सरकार होने के कारण यह साबित नहीं हो जाता कि इस खास हादसे के लिए मुख्यमंत्री या पूरी पार्टी सीधे दोषी है। कानूनी दोष जांच से तय होगा।
लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही जरूर तय होनी चाहिए। और वह जवाबदेही ऊपर से नीचे तक होनी चाहिए। और हम समझते हैं जब तक भ्रष्टाचार और रिशवतखोरी जड़ से ख़त्म नहीं होगी तब तक ये सब हादसे नहीं रुकेंगे.
और आज स्थिति यह है की रिश्वतखोरी को शासन और प्रशासन में बैठे अधिकतर लोगों ने अपना हक़ समझ लिया है और जनता भी इसी में खुश है की हमारा काम चल रहा है चाहे रिशवत से चले.
आखिर में कहा जासकता है की सत्य निकेतन का यह हादसा सिर्फ सात मौतों की खबर नहीं है। यह दिल्ली की urban governance का आईना है। यह हमारी शिक्षा नीति का मुंह चिढ़ाहती वेवस्था है यह क़ानून और नियमों की खिल्ली उड़ाती दिल्ली का दर्शन है .
और हादसे के बाद एक दो अधिकारीयों के suspension , investigation और COMPENSATION भी एकदम फ़र्ज़ी लगता है क्योंकि हादसे वहीँ के वहीँ , और CORRUPTION दोगुना चार गुना.
सवाल बहुत सीधा है—क्या हमारी लोकतान्त्रिक व्यवस्था नागरिकों और देश की सुरक्षा के लिए बनी है या सिर्फ हादसे के बाद जिम्मेदार तलाशने, सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े लोगों को बचाने, विपक्षियों और सवाल पूछने वालों को पकड़वाने के लिए?इसका जवाब सत्ता के साथ आपको भी देना है क्योंकि लोकतंत्र और संविधान को बचाने की ज़िम्मेदारी सरकार की तो है ही,लेकिन आपकी भी है और हमारी भी .
अगर सत्य निकेतन में आज सात लोगों की जान गई है, तो क्या दिल्ली के बाकी PG, hostel और पुरानी इमारतों का structural audit तुरंत कराया जाएगा? या फिर वक़्त गुजरने का इंतज़ार आप भी कर रहे हैं और सरकारें भी. याद रखें ” “जो कौमें अपने हक़ के लिए लड़ना छोड़ देती हैं, वो फिर अपनों की लाशें ढोती हैं।”

