नई दिल्ली, 20 सितंबर । संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार ने यहां कहा कि हिंदी युवा नाटकारों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो हर्ष की बात है। कुमार ने यह बात शनिवार को दिल्ली स्थित श्री राम सेंटर के सामने संजना बुक्स के स्टॉल ‘साहित्य के पेड़’ पर आयोजित वरिष्ठ रंगकर्मी एवं नाटककार आलोक शुक्ला के चौथे नाट्य संग्रह ‘पतझड़ के फूल और देखोना’ पुस्तक का लोकार्पण के अवसर पर कही।
किताब का लोकार्पण वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल, नाटककार एवं समीक्षक राजेश कुमार, संगीत नाटक अकादमी के उप सचिव सुमन कुमार, रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, वरिष्ठ लेखिका शशि सहगल, अभिनेता श्रीकांत वर्मा, नाटककार अनिल ठाकुर तथा संजना बुक्स की निदेशक संजना तिवारी ने संयुक्त रूप से किया।
सुमन कुमार ने हिंदी में नए नाटक नहीं लिखे जाने वाली आम धारणा को खारिज करते हुए कहा कि आलोक शुक्ला जैसे रचनाकार निरंतर सक्रिय हैं और रंगकर्मियों को इन समकालीन नाटकों को मंच पर लाना चाहिए।
वरिष्ठ नाटककार प्रताप सहगल ने आलोक शुक्ला के रचनाकर्म की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर बीमारी से जूझने के बावजूद उनका निरंतर लेखन और रंग-निर्देशन में सक्रिय रहना प्रेरणादायी है। उन्होंने दोनों पूर्णकालिक नाटकों के प्रकाशन पर लेखक को बधाई दी।
नाटककार एवं समीक्षक राजेश कुमार ने ‘पतझड़ के फूल’ की बनावट की सराहना करते हुए कहा कि इसमें बुजुर्गों की मनःस्थिति को केंद्र में रखते हुए दो अलग-अलग अंत दिए गए हैं, जो निर्देशक को अपनी दृष्टि के अनुसार मंचन की स्वतंत्रता देते हैं। वहीं दूसरे नाटक ‘देखोना’ पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह सामाजिक परिवेश को समझने के लिए आज मोहन राकेश के नाटकों को पढ़ा जाता है, उसी प्रकार आने वाले 10-15 वर्षों बाद कोरोना काल के सामाजिक यथार्थ को समझने के लिए आलोक शुक्ला का ‘देखोना’ एक महत्वपूर्ण नाट्य दस्तावेज के रूप में पढ़ा और मंचित किया जाएगा।
इस मौके पर रंग निर्देशक प्रदीप बाजपेयी, अभिनेता श्रीकांत वर्मा, विपिन कुमार, शशि सहगल और अनिल ठाकुर, नाटककार आलोक शुक्ला, अभिमन्यु सिंह चौधरी, शिखा मल्होत्रा और हिम्मत सिंह नेगी सहित बड़ी संख्या में साहित्य और रंगजगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे।

