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रवींद्रनाथ टैगोर के नोबेल पुरस्कार चोरी के मामले पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- ‘बंगाल की जनता का है अपमान’

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 161वीं जयंती पर उन्हें श्रृद्धांजलि देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा कि उन्हें मिले नोबेल पुरस्कार को अभी भी ढूंढा नहीं जा सका है जो 18 साल पहले चोरी हुआ था। बनर्जी ने कहा कि सीबीआई की यह विफलता बंगाल की जनता का बड़ा अपमान है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का पदक और प्रशस्ति पत्र 25 मार्च 2004 को विश्व भारती संग्रहालय से चोरी हो गए थे.

ममता बनर्जी ने उस कार्यक्रम में यह भी कहा, ‘ गुरुदेव का नोबेल पुरस्कार हमारे लिए गर्व की बात थी. लेकिन हम उनके पदक को सुरक्षित नहीं रख सके. अवार्ड चोरी हो गया. यह मुझे नहीं पता कि जांच के दौरान सभी सबूत संरक्षित रखे गए थे या नहीं, लेकिन यह हमारा बहुत बड़ा अपमान है.’रवींद्रनाथ टैगोर के नोबेल पुरस्कार चोरी के मामले पर भड़कीं ममता बनर्जी, बोलीं- ‘बंगाल की जनता का है अपमान’कोलकता.आज से 18 साल पहले देश के राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के रचयिता महाकवि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का नोबेल पुरस्कार कड़ी सुरक्षा के बीच चोरी हो जाती है. मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा जाता है. मगर सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लगता. आखिरकार वह मामले की जांच बंद कर देती है.

अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहती हैं कि यह राज्य के लोगों का ‘बड़ा अपमान’ है, क्योंकि सीबीआई मेडल को बरामद नहीं कर सकी.

सीएम ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह हमारा पहला नोबेल पुरस्कार था और किसी ने इसे चुरा लिया. हम सभी के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने सालों के बाद भी नोबेल पुरस्कार का पता नहीं चल सका.’ममता ने कहा, ‘यह हमें मिला पहला नोबेल था और किसी ने इसे हमसे छीन लिया। यह हमारा बहुत बड़ा अपमान है।’

टैगोर को साल 1913 में गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था। वह पहले एशियाई थे जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला था। गीताजंलि टैगोर की कविताओं का एक संकलन है।

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