केरल के राज्यपाल आर. वी. अरलेकर ने अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल को देश की अग्रणी साहित्यिक पहल बताया
अलीगढ़ की समृद्ध साहित्यिक विरासत की सराहना, एएलएफ-2026 के सफल आयोजन के लिए दी शुभकामनाएँ
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम, 3 अगस्त 2026: केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर ने अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल (एएलएफ) के सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए इसे देश की एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक एवं साहित्यिक पहल बताया है, जो साहित्य के प्रति सम्मान और सार्थक बौद्धिक संवाद को बढ़ावा देती है।
1 अगस्त 2026 को भेजे गए अपने संदेश में राज्यपाल ने अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन तथा उसके आधिकारिक स्मारिका (सुवेनियर) के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि अलीगढ़ सदियों से बौद्धिक चिंतन, साहित्यिक उत्कृष्टता और सांस्कृतिक समन्वय का एक उज्ज्वल केंद्र रहा है। इसी गौरवशाली विरासत पर आधारित यह साहित्य महोत्सव साहित्य के उत्सव, आलोचनात्मक चिंतन को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न भाषाओं, विषयों और विचारधाराओं के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
राज्यपाल अरलेकर ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में साहित्यिक आयोजनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। ऐसे मंच लेखकों, विद्वानों, चिंतकों और युवा रचनाकारों को एक साथ लाकर समकालीन समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श पर गंभीर विचार-विमर्श का अवसर उपलब्ध कराते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महोत्सव में होने वाले विचार-विमर्श, साहित्य पाठ और चिंतन-मनन न केवल पाठकों को प्रेरित करेंगे, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
अपने संदेश के अंत में राज्यपाल ने अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल के इस संस्करण की सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए आशा व्यक्त की कि यह आयोजन प्रतिभागियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी और यादगार सिद्ध होगा।
तिरुवनंतपुरम स्थित लोक भवन से जारी यह संदेश साहित्य और संस्कृति से जुड़े उन प्रयासों के प्रति संस्थागत समर्थन को भी रेखांकित करता है, जो बौद्धिक आदान-प्रदान, रचनात्मक अभिव्यक्ति और राष्ट्रीय संवाद को सुदृढ़ बनाते हैं।
अलीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल के प्रबंध न्यासी प्रो. जासिम मोहम्मद ने केरल के राज्यपाल के प्रेरणादायी संदेश के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल की शुभकामनाएँ और प्रोत्साहन आयोजन समिति को साहित्य, शोध, सांस्कृतिक सौहार्द और सार्थक जन-विमर्श को देशभर में और अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने के अपने संकल्प को और मजबूत करने की प्रेरणा देंगे।

