उन्होंने कहा, ”सप्तधारा की शक्ति है उत्पादन की शक्ति। हमें विनिर्माण को बढ़ाना होगा। उत्पादन के साथ हमें छोटे-छोटे पुर्जे बनाने हैं और बड़े उत्पाद भी बनाने हैं। पूरी वैल्यू चेन पर हमारा अधिकार होना चाहिए। डिजाइन से उत्पादन तक भारत को वैश्विक आपूर्ति शृंखलाका केंद्र बनना होगा। उत्पादन के क्षेत्र में जो लोग हैं, यह उनके लिए अवसर है। इसलिए हमें गुणवत्ता और पैमाने में वैश्विक मानदंडों पर खरा उतरना होगा। जीरो डिफेक्ट उत्पाद हमारी पहचान हों, यह तय करना होगा। वैश्विक बाजार में हमारी पहचान गुणवत्ता के आधार पर होगी। क्वालिटी से कोई समझौता नहीं। हमारा लक्ष्य गुणवत्ता, गुणवत्ता और गुणवत्ता होना चाहिए।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ” सुधारों को आगे बढ़ाना भी जरूरी है। यह हमारे लिए कन्विक्शन है। आने वाले दिनों में भी हम नेक्स्ट लेवल रिफॉर्म की तरफ बढ़ने वाले हैं। सभी को अपनी पारंपरिक व्यवस्था, सोच और लक्ष्यों में सुधार करना होगा। हमें अपने किसान, मजदूरों को नई दिशा में लेकर चलना होगा। विकसित भारत बनने के लिए हमें नई धारा चाहिए।”
उन्होंने कहा, ”हमारे सीफूड की दुनिया में आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। हमारी सी बेल्ट इस क्षेत्र में काफी काम आ सकती है। मैंने जो भूमिका आपके सामने रखी है, उसके पीछे 2047 का लक्ष्य एक मजबूत नींव पर खड़ा है। हमने पिछले 10-12 साल में देशवासियों ने जो सामर्थ्य दिखाया है, यह आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा है। इसका एक-चौथाई हिस्सा बीत चुका है और अब हमें लक्ष्य प्राप्त करके रहना है। हमें अपनी संस्कृति, सोच और काम की गति को बदलना होगा। जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए हैं, वह काम हमें करने में हमें 5-7 साल लगे हैं। मुझे भरोसा है कि हम इस सपने को साकार कर सकते हैं।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”भारत आज दुनिया में स्थिर सरकार के साथ आगे बढ़ रहा है। दुनिया में हमारा सम्मान बढ़ रहा है। हम सबको दिशा देने वाला भारत का संविधान है। आज दुनिया भारत का सामर्थ्य पहचान रही है। अब देखिए कितना बड़ा अवसर आया है। व्यापार समझौते हुए हैं। इसलिए मैं एमएसएमई को कहना चाहूंगा कि हमें इन मौकों को छोड़ना नहीं है। हमारी मशीनरी हो, टेक्सटाइल हो, दवाइयां हों, हमें मौका छोड़ना नहीं है। हमें गुणवत्ता के साथ चलना होगा। हमें वैश्विक मानकों पर चलना होगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ” एक समय था, जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ लोग एसी में बैठकर बात करने वाले लोग हमें बता रहे थे कि वैश्वीकरण का क्या होगा। जहां से वैश्वीकरण की आवाज आती थी, उसने बोलना ही बंद कर दिया।” उन्होंने कहा, ”हमने सोचा भी नहीं था कि हमें कुछ समस्याओं को झेलना पड़ेगा। 12 साल में हमने कोरोना जैसी महामारी झेली, जिसने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया। कोरोना के बाद कहीं यूक्रेन तो कहीं पश्चिम एशिया, हर जगह तनाव का माहौल। कुछ लोगों को तो सिर्फ देश को भयभीत करने, डराने में मजा आता है। कोरोना वैक्सीन नहीं मिलेगी, यह नहीं होगा, पेट्रोल पंप पर पेट्रोल नहीं मिलेगा, गैस नहीं मिलेगी, डीजल नहीं मिलेगा, फर्टिलाइजर नहीं मिलेगा। कुछ लोगों को देश को डराने में आनंद आ रहा था। लेकिन देश ने देख लिया कि हम नागरिक देवो भवः के मंत्र को लेते हुए, जिस तरह से योजनाओं को आगे बढ़ाया था, उनसे देश को कोई समस्या नहीं हुई। आज देश में पेट्रोल भी है, गैस भी है, डीजल भी है। हम अपनी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा, ” हम पांच न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। देश को आज कच्चे तेल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, यह हमारी गलत सोच के कारण है। हमने समुद्र तट का 99 फीसदी इलाका नो गो एरिया घोषित कर के रखा है। हमने ही समुद्र के अंदर जाकर एक्प्लोरेशन न करने का फैसला किया। हमने उस 99 फीसदी इलाका जो नो गो हुआ करते थे। हमने उसे खुला कर दिया। अब हम समुद्र के अंदर एक्सप्लोरेशन करने का प्रयास किया है। उसी दिशा में हमने समुद्र मंथन की घोषणा की थी। हाल ही में हमने 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर उस काम को आगे बढ़ाने का काम किया।”

