फिरोजाबाद में खाकी पर गंभीर सवाल!
पति को पुलिस ले गई… गर्भवती पत्नी की हालत बिगड़ी, बेटे को जन्म देने के बाद मौत
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला शिकोहाबाद के लभौआ गांव का है, जहां 28 वर्षीय गर्भवती महिला अंजलि की प्रसव के बाद मौत हो गई।
बताया जा रहा है कि गांव में एक परचून की दुकान में चोरी के मामले में पुलिस रविवार रात अंजलि के पति गौरव को पूछताछ के लिए हिरासत में लेने पहुंची थी। परिवार का आरोप है कि गौरव की पत्नी करीब साढ़े आठ महीने की गर्भवती थी और उसने पुलिस से पति को रात में न ले जाने की गुहार लगाई थी।
लेकिन इसके बाद मामला और गंभीर हो गया।
परिजनों का आरोप है कि पुलिस के साथ धक्का-मुक्की के दौरान अंजलि को धक्का दिया गया और एक पुलिसकर्मी द्वारा पेट में लात मारने तक का आरोप लगाया गया। इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच से होनी बाकी है।
अंजलि की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया।
लेकिन प्रसव के बाद उनकी हालत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों के मुताबिक उनका हीमोग्लोबिन काफी कम था और प्रसव के बाद ब्लड प्रेशर गिर गया। उन्हें आगे इलाज के लिए रेफर किया गया, लेकिन निजी अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
और इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे इलाके को हिला दिया। महिला की मौत की खबर मिलते ही ग्रामीणों ने शिकोहाबाद थाने का घेराव कर दिया। बड़ी संख्या में लोग थाने पहुंचे और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी हुई। हालात बिगड़ने पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजीलाल सुमन ने शिकोहाबाद थाने पर धरना देकर पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और कड़ी कार्रवाई की मांग की। यह राजनीतिक मांग है; इसका कानूनी निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।
सबसे बड़ा सवाल—अगर पुलिस को महिला की हालत का पता था तो?
इस मामले में पुलिस विभाग ने भी कार्रवाई की है। एसएसपी आदित्य लांग्हे ने लापरवाही के आरोप में दो दरोगा समेत छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। जांच एएसपी जयबिंद कुमार गुप्ता को सौंपी गई है। एसएसपी के मुताबिक, जब पुलिस को गौरव की पत्नी की तबीयत खराब होने की जानकारी थी तो उसे छोड़ा जाना चाहिए था।
लेकिन सवाल अभी खत्म नहीं हुए हैं। क्या अंजलि की मौत सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं की वजह से हुई? या फिर— पुलिस की कार्रवाई, कथित धक्का-मुक्की और उसके बाद बिगड़ी हालत का भी इसमें कोई संबंध था?
इन सवालों का जवाब अब जांच, पोस्टमार्टम और उपलब्ध मेडिकल साक्ष्यों से ही सामने आएगा।
और इस मामले में एक और नया मोड़ आया है। 16 सितंबर को अंजलि की चिता की राख से लोहे की एक छेनी मिलने की बात सामने आई, जिसके बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। इस नए घटनाक्रम की भी जांच की जा रही है।
एक तरफ एक मां अपने नवजात बच्चे को जन्म देकर इस दुनिया से चली गई…
दूसरी तरफ छह पुलिसकर्मी निलंबित हो चुके हैं।
लेकिन असली सवाल यही है—
आखिर अंजलि की मौत की पूरी सच्चाई क्या है?
क्या पुलिस की कार्रवाई महज एक संयोग थी, या फिर इस दर्दनाक मौत के पीछे कोई ऐसी कड़ी है जिसे जांच में सामने आना बाकी है?
अब निगाहें जांच रिपोर्ट और मेडिकल साक्ष्यों पर हैं—क्योंकि इस मामले में आरोप जितने गंभीर हैं, उतना ही जरूरी है कि सच पूरी तरह सामने आए और जिम्मेदारी तय हो।

