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पुलिस ने फूंके नेताओं के पुतले , 160 आदिवासियों के घर किये गए नज़र ए आतिश

रायपुर। देश में प्रदर्शन के इतिहास में एक अनोखा मामला सामने आया है। देश में इस तरह का ये पहला मामला है। यह मामला बीजेपी शासित राज्य छत्तीसगढ़ से आया है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पुलिस जवानों ने नेताओं और सोशल वर्कर्स का पुतला फूंका। बस्तर डिवीजन के जगदलपुर और कोंडागांव जिला मुख्यालयों की पुलिस ने इस काम को अंजाम दिया। इसकी वजह नेताओं और सोशल वर्कर्स का नक्सलियों को सपोर्ट करना बताया गया है।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने पूर्व सीपीएम विधायक मनीष कुंजाम, आप नेता सोनी सोढ़ी और सोशल वर्कर्स नंदिनी सुंदर, बेला भाटिया और हिमांशु कुमार का पुतला फूंका। यही नहीं पुलिस जवानों ने वर्दी में मार्च भी निकाला। बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर के अलावा कोंडागांव में पुतले फूंके गए हैं।
आपको बता दें कि बस्तर पुलिस ने इसके लिए बाकायदा प्रेस रिलीज भी जारी की है। इसमें नेताओं-वर्कर्स पर नक्सलियों के सहयोग का आरोप लगाया है। प्रेस रिलीज “समस्त सहायक आरक्षक” की ओर से जारी की गई है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि हमलोग नक्सलियों से बस्तर की सुरक्षा के लिए फोर्स में भर्ती हुए हैं। लेकिन नंदनी सुंदर, हिमांशु कुमार, बेला भाटिया, सोनी सोढ़ी एवं मनीष कुंजाम जैसे लोग नक्सल समर्थक हैं व पुलिस बलों को बदनाम करते रहते हैं।
पुलिस ने आरोप लगाया कि ये लोग नक्सलियों से पैसा वसूली में लगे हुए हैं और बस्तर को खोखला कर रहे हैं। पुलिस ने कहा हम ऐसे नक्सल समर्थकों से शर्मिंदा होकर इन पांचो का पुतला जला रहे हैं ताकि बस्तर के लोग इनका असली चेहरा पहचानें।
दरअसल उक्त लोगों पर पहले से ही नक्सलियों के सहयोग के आरोप लगते रहे हैं लेकिन मामले ने मंगलवार को इस घटना ने अचानक तूल पकड़ लिया जब सीबीआई ने ताड़मेटला कांड से जुड़ी रिपोर्ट विशेष अदालत में पेश की।

 

सीबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2011 में सुकमा के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में आदिवासियों के घर जलाने वाले पुलिस के लोग थे न कि नक्सली। खबर फैलते ही बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी पर जुबानी हमले बढ़ गए। पहले से ही कल्लूरी को हटाने की मांग उठा रहे नेता खुलकर सामने आ गए। पुलिसवालों की इस प्रतिक्रिया को बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

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