पाकिस्तान PM का सऊदी दौरा ऐसे वक्त में, जब पूरा क्षेत्र निर्णायक मोड़ पर खड़ा है !
Doha: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का सऊदी अरब दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पूरा मध्य-पूर्व एक बेहद अहम और निर्णायक दौर से गुजर रहा है। इसलिए इस यात्रा को क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्षेत्र की सुरक्षा सिर्फ सऊदी अरब के लिए ही अहम नहीं है, बल्कि तुर्किये और पाकिस्तान के लिए भी इसकी बड़ी अहमियत है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि पाकिस्तान और तुर्किये, दोनों की सीमाएं ईरान से लगती हैं। ऐसे में ईरान से जुड़ा कोई भी बड़ा सैन्य या राजनीतिक घटनाक्रम इन देशों को सीधे प्रभावित कर सकता है।
दरअसल, इस कूटनीतिक पहल की नींव इसी साल अप्रैल में रखी गई थी। उस समय मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये—इन चार देशों के समूह, जिसे ‘R4’ कहा जा रहा है, की पहली अहम बैठक रियाद में हुई थी।
इस बैठक में चारों देशों ने पाकिस्तान को ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ाने और दोनों के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों में नेतृत्व की जिम्मेदारी दी थी।
अब पिछले 24 घंटों के दौरान इन चारों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है। माना जा रहा है कि इन बैठकों में संभावित कूटनीतिक पहल के कई अहम पहलुओं और आगे की रणनीति पर सहमति बनाने की कोशिश की गई है।
इस पूरी कवायद की खास बात यह है कि क्षेत्र की प्रमुख ताकतें अब एक साझा मंच पर दिखाई दे रही हैं। एक तरफ पाकिस्तान और तुर्किये की सैन्य क्षमता और रणनीतिक प्रभाव है, तो दूसरी तरफ मिस्र का क्षेत्रीय महत्व और सऊदी अरब की आर्थिक ताकत।
यानी सैन्य शक्ति, तकनीक, ऊर्जा संसाधन और आर्थिक ताकत—इन सभी को एक साथ लाने की कोशिश हो रही है।
ईरान के साथ हालिया युद्ध के बाद मध्य-पूर्व जिस अस्थिरता और तनाव से गुजर रहा है, उसे देखते हुए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का सऊदी दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि यह सिर्फ दो देशों के बीच सामान्य राजनयिक यात्रा नहीं, बल्कि ऐसे समय में हो रहा है जब पूरे क्षेत्र को युद्ध से निकालकर बातचीत और कूटनीति की ओर ले जाने की कोशिशें तेज़ होती दिखाई दे रही हैं। Credit Al Jazeera

