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नोटबंदी के बाद से घरेलू हिंसा ,लूटपाट ,रहज़नी , तथा अन्य अपराध में विरद्धी

New Delhi/Top Bureau:देश भर में नोटबंदी के बाद बढती कैश की कमी ने महिलाओं के जीवन में सिर्फ खरीदारी के स्तर को ही प्रभावित नहीं किया बल्कि घरेलू हिंसा को भी बढ़ाया है| कई परिवारों के पुरुषों ने कैश की किल्लत के कारण घर के खर्च के लिए पैसा देना ही बंद कर दिया| हैदराबाद में चलने वाले सपोर्ट और काउंसलिंग सेंटर्स ने पाया है कि महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा की वारदातों में नोटबंदी के बाद बढ़ोत्तरी हुई है|

करीब 200 से ज्यादा महिलाओं की शहर के करीब दर्जन भर सेंटरों को शिकायतें मिली हैं| अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद से उनके पति उनका उत्पीड़न और अनदेखा कर रहे हैं | बीते महिने 50 से ज्यादा ऐसी शिकायतें महिलाओं के लिए काम करने वाले कॉल सेंटर भूमिका ने दर्ज की है| तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हेल्प लाइन चलाने वाली सत्यवती के मुताबिक़ ज़्यादातर महिलाओं की यही शिकायत थी कि नोटबंदी के बाद उनके पति बच्चों और परिवार की देखरेख नहीं कर रहे हैं | कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें पतियों ने घर से दूर रहना ही बेहतर समझा |

सेंटर के कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ पहले भी घरेलू हिंसा का रेकॉर्ड रहा है मगर नोटबंदी के बाद यह और भी दयनीय हो गया है | उन्होंने बताया कि एक महिला ने हमें कॉल कर बताया कि उसके पति ने घर खर्च देना बिल्कुल ही बंद कर दिया है| उसने बताया मेरा एक छोटा बेटा है उसकी देखभाल बहुत ज़रूरी है | इस बारे में संगठन की कार्यकर्ता ने उस पुरुष से बात की | लेकिन वह कार्यकर्ता को भी गाली देते हुए बोला कि मेरे पास कैश नहीं है घर के खर्च के लिए पैसे कहाँ से लाऊं | काउंसलर्स के मुताबिक़ इस तरह की घटनाएं निम्न वर्गीय और मध्यम वर्गीय परिवारों में अधिक है |यही हाल कमोबेश देश के सभी भागों में है ।

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