Site icon TIMES OF PEDIA

MLC चुनाव: नागपुर में BJP को झटका! कांग्रेस ने मारी बाज़ी

MLC चुनाव

MLC चुनाव

RSS के गढ़ नागपुर में BJP की हार, कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने 3,271 वोटों से दर्ज की जीत; 40 घंटे से ज़्यादा चली मतगणना में दूसरे वरीयता के वोटों ने बदला खेल!

नागपुर, 29 अक्टूबर 2026: अक्टूबर 23 को उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर मतदान हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की 8, महाराष्ट्र की 5 और कर्नाटक की 4 सीटें शामिल थीं। इन चुनावों में स्नातक, शिक्षक और स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं ने हिस्सा लिया। महाराष्ट्र में विपक्षी महाविकास आघाड़ी ने 5 में से 3 सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को 2 सीटें मिलीं।

 महाराष्ट्र विधान परिषद के चुनाव परिणाम में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय वाले नागपुर में कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य अभिजीत वंजारी ने BJP उम्मीदवार और पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी है।

दूसरी तरफ़ कर्णाटक में कांग्रेस का खाता न खुलने को एंटी इंकम्बेंसी से जोड़कर भी देखा जा रहा है. और यह कांग्रेस के लिए मंथन का समय है.

यह नतीजा BJP के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र है। दोनों नेताओं ने BJP उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की जीत ने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े किए हैं।

अंतिम मतगणना के अनुसार:
अभिजीत वंजारी (कांग्रेस): 67,231 वोट
सुधाकर कोहले (BJP): 63,960 वोट
जीत का अंतर: 3,271 वोट

निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को 24,249 वोट मिले। मतगणना मंगलवार सुबह शुरू हुई और गुरुवार तड़के पूरी हुई। पूरी प्रक्रिया में 40 घंटे से अधिक समय लगा। ख़ास बात यह रही कि दूसरे राउंड तक BJP आगे होने के बाद पिछड़ गई.

फिर कैसे पलटी बाज़ी?

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू मतगणना का उतार-चढ़ाव रहा। दूसरे राउंड के बाद BJP उम्मीदवार सुधाकर कोहले 60,924 प्रथम वरीयता मतों के साथ आगे थे, जबकि अभिजीत वंजारी को 56,630 वोट मिले थे। यानी उस समय कोहले की बढ़त 4,294 वोटों की थी।

लेकिन कोई भी उम्मीदवार निर्धारित जीत का कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती और नियमानुसार मतों के हस्तांतरण की प्रक्रिया हुई। इसी चरण में मुकाबले की दिशा बदली और अंततः वंजारी 3,271 वोटों से विजयी घोषित हुए।

यह परिणाम बताता है कि वरीयता-आधारित चुनाव प्रणाली में शुरुआती बढ़त और अंतिम जीत के बीच अंतर हो सकता है।

RSS और BJP के गढ़ में जीत का राजनीतिक महत्व

नागपुर को लंबे समय से BJP और RSS के प्रभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 1990 से 2014 तक लगभग 24 वर्षों तक इसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व किया था।

ऐसे क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार का दोबारा जीतना विपक्ष के लिए राजनीतिक उपलब्धि है। हालांकि, केवल एक MLC सीट के नतीजे से पूरे महाराष्ट्र में BJP के जनाधार के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अभिजीत वंजारी ने 2020 में भी BJP उम्मीदवार संदीप जोशी को हराकर यह सीट जीती थी। इस बार सीट बरकरार रखने के साथ उन्होंने नागपुर में कांग्रेस की मौजूदगी को फिर दर्ज कराया है।

महाराष्ट्र की पांच सीटों पर किसे कितनी सफलता?

23 अक्टूबर को हुए विधान परिषद चुनाव की पांच सीटों के घोषित परिणामों में विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ महायुति को दो सीटें मिलीं।

नागपुर स्नातक: अभिजीत वंजारी — कांग्रेस
पुणे स्नातक: हर्षदा देशमुख-जाधव — NCP (शरद पवार गुट)
मराठवाड़ा स्नातक: डॉ. प्रताप पाटिल — NCP (शरद पवार गुट)
पुणे शिक्षक: कौस्तुभ गावड़े — BJP
अमरावती शिक्षक: किरण सरनाईक — शिवसेना (शिंदे गुट)

इस तरह नागपुर में कांग्रेस की जीत विपक्षी गठबंधन की तीन सीटों में शामिल है। लेकिन राज्य की तस्वीर मिश्रित है—BJP और उसके सहयोगियों ने भी दो सीटों पर जीत हासिल की।

क्या नागपुर का नतीजा BJP के लिए चेतावनी है?

नागपुर में कांग्रेस की जीत BJP के लिए स्थानीय स्तर पर झटका ज़रूर है। फडणवीस और गडकरी के गृह क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार की हार इस बात की याद दिलाती है कि किसी क्षेत्र में संगठनात्मक प्रभाव होने के बावजूद हर चुनाव का परिणाम निश्चित नहीं होता। आरएसएस के अपने गढ़ नागपुर में कांग्रेस की जीत को राहुल की विचारों के लड़ाई की जीत भी माना जा रहा है.

राहुल गांधी का मानना है कि भारत विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों का एक गुलदस्ता है। वे आरोप लगाते हैं कि RSS पूरे भारत पर केवल एक ही विचार (One Idea) थोपना चाहता है। उनके अनुसार, RSS यह मानता है कि कुछ राज्य, भाषाएं और समुदाय दूसरों से कमतर हैं, जबकि कांग्रेस सभी को समान मानती है

दूसरी ओर, स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसमें पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं और वरीयता-आधारित मतगणना निर्णायक भूमिका निभा सकती है। इसलिए इस परिणाम को पूरे राज्य के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद का सीधा प्रतिबिंब मानना सही नहीं होगा।

RSS मुख्यालय वाले नागपुर में अभिजीत वंजारी की जीत कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक सफलता है। BJP के लिए चुनौती यह है कि वह अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में इस हार के कारणों का आकलन करे। आने वाले चुनावों में यह परिणाम कितना व्यापक राजनीतिक असर डालेगा, इसका फैसला आगे के नतीजे ही करेंगे।

Exit mobile version