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मोदी की बुनकरों के नाम वीडियो और इरफ़ान की पॉपुलैरिटी

मोदी की बुनकरों के नाम वीडियो
Ali Aadil Khan Editor’s Desk

 “दोस्तों आज मोदी जी का ऐसा वीडियो हम दिखाने जारहे हैं जिसको न तो सोशल मीडिया पर लाया गया और न ही गोदी मीडिया पर … जिसमें उनके सामाजिक हावभाव, चरित्र और राजनितिक बदलाव की एक झलक और निराला अंदाज़ देखने को मिलेगा ?”

उन्होंने जिस अंदाज़ में 7 अगस्त को नेशनल हैंडलूम डे मनाने के लिए देश की जनता से अपील की है वो वाक़ई तस्वीर का नया किरदार बयाँ करती है ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपील की कि वो हथकरघा यानी Handloom को बढ़ावा दें … देश के बुनकरों, कारीगरों और स्थानीय उत्पादों को अपनाए और इसका advertisement भी करें ।

VIDEO क़ाबिले तारीफ है, क्योंकि हाल के बरसों में पहली बार प्रधानमंत्री का कोई ऐसा वीडियो देखने को मिला , जिसमें देश के उस वर्ग के उत्पादों को बढ़ावा देने की कोशिश और नीयत नज़र आई, जिस वर्ग के हाथों की मेहनत से देश की अर्थव्यवस्था को सीधे सीधे लाभ होता है।

बुनकर, कारीगर , दस्तकार, छोटे उत्पादक…यानी वो लोग जिनके पास कैमरा नहीं होता, कोई एडवांस टेक्नोलॉजी और मशीनें नहीं होतीं लेकिन उनके हाथों में हुनर होता है, मेहनत और लगन होती है। और यह देश के विकास में उनका बड़ा योगदान होता है जिसकी उनको क़ीमत नहीं मिलती . PM मोदी के इस वीडियो के बाद शायद उनका भला होसके शायद कुछ आंसू पुंछ सकें.

मोदी जी को इस Video के लिए मुबारकबाद। सरकारों के अच्छे कामों की सराहना भी होनी ही चाहिए इससे सरकारों की भी होंसला अफ़ज़ाई होती है और यह उनका हक़ भी है .

ऐसे में जब किसी प्रधानमंत्री के बोलने के अंदाज़, भाषा शैली, चुनावी रैलियों में सांप्रदायिक और नफ़रती बयानबाज़ी, तारीखी झूठ और अंग्रेजी उच्चारण, गले मिलने और गले पड़ने के अंदाज़ की देश और दुनिया में फ़ज़ीहत हो रही हो मज़ाक़ बनाई जा रही हो ऐसे में देश के मेहनतकश और हाशिये पर पड़े वर्ग के Product को हमारे प्रधानमंत्री जी बढ़ावा देने की बात कर रहे हों, देशवासियों से इसे खरीदने के लिए प्रेरित कर रहे हों तो प्रधानमंत्री की तारीफ़ करना हम अपनी ज़िम्मेदारी समझते हैं ।

लेकिन…यह सवाल भी होना चाहिए, क्या देश के शोषित, वंचित और मेहनतकश वर्ग और उसके product को सिर्फ़ 7 अगस्त को ही याद किया जाएगा? या फिर साल के 365 दिन उनकी रोज़ी, छोटे बाज़ार, दुकाने, घर, उनके मज़हबी मक़ामात , मजदूरी , उनके अधिकारों और धार्मिक तथा सामाजिक और कारोबारी आज़ादी की रक्षा की भी गारंटी होगी ?

और र र र ….. हैंडलूम सिर्फ़ एक कपड़ा नहीं है। बल्कि यह देश की धरोहर है , विरासत है पहचान है और इससे जुड़े पूरे समुदाय की सरकारों से उमीदें भी हैं .

अब इस वीडियो को देखकर लगता है , मोदी जी भी इन दिनों वायरल बॉय इरफ़ान को बड़े ध्यान से देख रहे हैं, या दिखाया जा रहा है !

क्योंकि सोशल मीडिया पर इरफ़ान जिस तरह आम लोगों, वंचि, शोषित, हर समुदाय हर वर्ग के छोटे कारोबारियों और मेहनतकशों के उत्पादों को कैमरे के सामने लाकर उन्हें पहचान दिला रहा है, इसी के साथ इरफ़ान के ज़मीनी जीवन और प्रधानमंत्री के इस नए अंदाज़ के VIDEO में कुछ दिलचस्प समानता दिखाई देती है।

जिसको आप महसूस करेंगे, फर्क़ बस इतना है कि इरफ़ान के साथ कुछ ईमानदार और सेक्युलर पत्रकारों का कैमरा है…और मोदी जी के साथ प्रधानमंत्री का पूरा सरकारी तंत्र, लाहो लश्कर और अंतर्राष्ट्रीय प्लेटफ़ॉर्म!

लेकिन अगर इस VIDEO से देश का आम कारीगर, बुनकर और मजदूर वर्ग का भला होता है और यह चर्चा में आता है…तो हमारी तो गुज़ारिश होगी—मोदी जी, ये सिलसिला अपने बचे PM कार्यकाल में जारी रखें । और हैंडलूम के बाद HANDICRAFT मज़दूरों, मिटटी के बर्तन बनाने वालों , संभल, मुरादाबाद, नगीना, सहारनपुर ,बनारस, भागलपुर, बीदर और मद्रास के Handicraft बरादरी की ज़िंदगी को भी अपनी इसी तरह की वीडियो के माध्यम से चर्चा में लाएं और प्रोत्साहित करें. उम्मीद है आपके सच्चे भक्तों की तादाद बढ़ जाएगी .

और इसी के साथ अपने भक्तों को भी कभी-कभी याद दिलाते रहें कि लोकतंत्र में प्रधानमंत्री की तारीफ़ करना या भगवान् बनाना सच्चा देश प्रेम नहीं है. बल्कि मोदी जी आप बड़ा दिल करके यह भी बताइये कि प्रधानमंत्री से सवाल करना, सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध करना भी जागरूक नागरिक और सच्चे देशभक्त का अधिकार और उसकी ज़िम्मेदारी है।

और साथ ही आप Agencies को भी निर्देश जारी करें, कि अगर कोई नागरिक हमसे यानी प्रधानमंत्री या सरकार से सवाल पूछे या उससे असहमति जताये तो उसे देशद्रोही, पार्टी विरोधी या हमारा दुश्मन समझने की ज़रूरत नहीं उसपर मुक़द्दमा चलाने की ज़रूरत नहीं बल्कि उसको उसकी हिम्मत के लिए सच्चे देशप्रेमी का प्रमाणपत्र जारी किया जाए .

हो सके तो अपनी VIDEO में शासक वर्ग और अपनी पूरी कैबिनेट को यह भी बताएं कि देश के युवाओं , छात्रों , किसानो और वंचित, शोषित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वर्ग को उनकी औक़ात याद दिलाने की ज़रूरत नहीं—बल्कि लोकतंत्र में तो सरकार में बैठे लोगों को अपनी औक़ात में रहना चाहिए , यानी देश और जनता की सेवा में विलीन रहना चाहिए, क्योंकि उनकी औक़ात और असलियत तो एहि है.

तो श्रीमान प्रधानमंत्री महोदय …हैंडलूम डे पर आपका यह वीडियो क़ाबिले तारीफ़ है अब देश राजनितिक परिवर्तन की उम्मीद करता है कि आपका कैमरा सिर्फ़ परियोजनाओं के उद्घाटनों, धार्मिक स्थलों पर आपके PHOTO SESSIONS , मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठाओं और दुसरे विज्ञापनों पर ही नहीं चलेगा बल्कि आपका कैमरा , देश के मेहनतकश, छोटे कारोबारियों, किसानों , छात्रों , युवाओं और मज़लूमों की सिसकती बिलक्ति बहकती और मचलती ज़िंदगियों पर भी पड़ेगा जो आपकी दया , करुणा, हमदर्दी, और गारंटी से अब तक वंचित रहीं ।

वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हें याद हो कि न याद हो
वही या’नी वा’दा निबाह का तुम्हें याद हो कि न याद हो

कभी हम में तुम में भी चाह थी कभी हम से तुम से भी राह थी
कभी हम भी तुम भी थे आश्ना तुम्हें याद हो कि न याद हो

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