मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव: दो कुकी युवकों की हत्या के विरोध में कांगपोकपी बंद, सरकार पर कार्रवाई का दबाव
कांगपोकपी, मणिपुर | 4 नवंबर 2026: मणिपुर में जातीय तनाव के बीच कांगपोकपी जिले में दो कुकी युवकों की हत्या के विरोध में बुलाए गए बंद से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मंगलवार, 3 नवंबर को बंद लगातार दूसरे दिन जारी रहा। बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि इंफाल की ओर जा रहे सामान से लदे कई वाहन राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से कांगपोकपी में प्रवेश नहीं कर सके और पड़ोसी सेनापति जिले में फंसे रहे। हालात पर नियंत्रण रखने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए।
लापता होने के बाद मिले दोनों युवकों के शव
मृतकों की पहचान टिंगिनलुन चोंगलोई (21) और पाओगिनलाल हंगशिंग (20) के रूप में हुई है। दोनों कांगपोकपी जिले के ताफौ कुकी गांव के निवासी थे।
रिपोर्टों के अनुसार, दोनों युवक 28 अक्टूबर को हेंगबुंग और ताफौ कुकी गांव के बीच यात्रा करते समय लापता हो गए थे। उनकी तलाश में मणिपुर पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों ने अभियान चलाया। 1 नवंबर को पड़ोसी सेनापति जिले के पहाड़ी इलाके में दोनों के शव बरामद किए गए।
शव मिलने की खबर के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और शवों को जिला अस्पताल ले जाए जाने के दौरान तनाव बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें आईं। अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान कम-से-कम तीन प्रदर्शनकारी घायल हुए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवा में गोलियां चलाईं।
सरकार की कथित निष्क्रियता के खिलाफ बंद
कुकी-जो समुदाय के संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने आरोप लगाया कि दोनों युवकों को सुरक्षित खोजने और उनकी जान बचाने के लिए पर्याप्त तथा निर्णायक कदम नहीं उठाए गए। संगठन ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की।
CoTU ने पहले 24 घंटे के बंद का आह्वान किया था, जिसे बाद में बढ़ाया गया। संगठन का कहना है कि केवल आश्वासन देने से न्याय नहीं मिलेगा और जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उसका विरोध जारी रहेगा।
संगठन की पांच प्रमुख मांगें
रिपोर्टों के अनुसार, CoTU ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:
- राज्य मंत्रिमंडल से उपमुख्यमंत्री लोसीई दिखो को हटाया जाए।
- ताफौ कुकी गांव को सेनापति पुलिस के अधिकार क्षेत्र से हटाकर कांगपोकपी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में लाया जाए।
- सेनापति जिले के ओकलोंग शिविर में NSCN-IM की हुतरोंग ब्रिगेड को हटाया जाए।
- मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपी जाए।
- अपहरण और हत्या में शामिल लोगों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए।
संगठन ने यह भी कहा है कि वह अपनी मांगों पर कार्रवाई होने तक शवों को स्वीकार करने के सवाल पर अड़ा हुआ है। इन मांगों पर सरकार की ओर से क्या ठोस कदम उठाए गए हैं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मणिपुर का पुराना जातीय संकट फिर चिंता बढ़ा रहा है
मणिपुर में मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुआ जातीय संघर्ष राज्य की सुरक्षा और सामाजिक एकता के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। घाटी में मुख्य रूप से मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में बड़ी संख्या में कुकी समुदाय के लोग रहते हैं। हिंसा के दौरान बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ और हजारों लोग विस्थापित हुए।
हाल के महीनों में कुकी और नागा समुदायों के बीच भी कुछ इलाकों में झड़पों की खबरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में दो युवकों की हत्या ने स्थानीय स्तर पर असुरक्षा और अविश्वास को और बढ़ा दिया है।
हालांकि, इस मामले में आरोपियों की पहचान और हत्या के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। किसी समुदाय को सामूहिक रूप से दोषी ठहराने के बजाय जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती
कांगपोकपी में बंद और विरोध प्रदर्शन राज्य सरकार के लिए कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनता का भरोसा बहाल करने की भी परीक्षा हैं। प्रशासन के सामने तीन तात्कालिक जिम्मेदारियां हैं—हत्या की निष्पक्ष जांच, दोषियों की कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तारी और प्रभावित लोगों को सुरक्षा का भरोसा देना।
साथ ही, बंद के कारण फंसे वाहनों, आम नागरिकों और जरूरी सामान की आवाजाही पर पड़ रहे असर को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सुरक्षित रहे और हिंसा या प्रतिशोध की किसी भी कोशिश को रोका जा सके।
कांगपोकपी की घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि मणिपुर में शांति बहाली के प्रयास जमीन पर कितने प्रभावी हैं। न्याय में देरी, प्रशासन पर अविश्वास और समुदायों के बीच बढ़ती दूरी हालात को और बिगाड़ सकती है। अब जरूरत है कि जांच पारदर्शी हो, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो और सरकार तथ्यों तथा ठोस कदमों के जरिए जनता का विश्वास बहाल करे।

