कल चाँद से मुलाक़ात हुई मैंने पूछा तुमहारी जय बोलूं?चाँद बोला नहीं मैँ अभी डूब जाऊँगा , सूरज से मिला उससे पूछा तुमहारी जय बोलूं? उसने कहा नहीं मैँ तो शाम तक डूब जाऊँगा , सितारों से मिला वो बोले नहीं हम तो सुबह होते होते डूब जाएंगे , बादलों से पूछा बोले नहीं हम तो टूट जाएंगे ,मैँ परेशान था की जय किसकी बोलूं…
इतने में याद आया की शायद बड़े पीर साहब की जय बोली जाए उनके मज़ार शरीफ पर गया उनसे पूछा क्या हम जय आपकी बोलें? कहने लगे नहीं मैँ तो खुद मोहताज हूँ आप लोगों की दुआ व् नियाज़ का , सोचा चर्च चलूँ शायद जीसस की जय बोली जाती हो चर्च गया स्टेचू के सामने खड़ा हुआ पूछा क्या मैँ आपकी जय बोलूं? बोले नहीं मैँ तो खुद यहूदियों के द्वारा सूली चढ़ा दिया गया था मगर मेरे रब ने मुझे आसमान पर उठा लिया दुनिया में वापस आकर दज्जाल को फ़ना करूँगा जिसको यहुदिओं ने अपना खुदा बनाया हुआ है ,सोचा मदीना जाकर ही देखूं और आखरी रसूल मुहम्मद (स.अ.व.) से पता चले कहीं वो तो जय के मुस्तहिक़ नहीं वहां भी यही जवाब मिला ये तो अब तुम्हारी शिफ़ाअत आखरत (परलोक ) में ही करेंगे यहाँ इनकी जय या इबादत नहीं हो सकती बस दरूद और सलाम इनपर भेजो ।और उनकी पैरवी की जाए ।
ग़रज़ लोक परलोक में घूम फिरा कोई न मिला जो यह कह देता की मेरी जय बोलो , क्या आप किसी को जानते हैं जो यह कहे की मेरी जय बोलो ,अलावा स्वार्थी या स्वेयम्भू नेता ,पीर साधू या फ़क़ीर के , …
अरे याद आया …चलो नाग देवता से पूछलें होसकता है वही कह दें मेरी जय बोली जाए सपेरा साथ लिया चूंकि मुझे तो डर लग रहा था देवता के पास जाते हुए सपेरे ने बीन बजाना शुरू करदी अचानक फूं फूं करते कई सांप इकट्ठे होगये , लो आगये नाग देवता मुझे तो इंतज़ार था ,,,उनसे भी सवाल किया गया कि आपकी जय बोलना चाहिए? बोले इनकी जय बोलो जिन्होंने हमको यहाँ बुलाया यानि सपेरे साहब की उनसे पूछना ही चाहता था की अचानक उनकी नाक में ऐसा मचछर घुसा की वो बेहोश होगये .
जंगल में ही चूहा दिखा सोचा आया हूँ तो इनसे भी पूछ के नीमट चलूँ उनसे पता करने पीछे चला तो वो एक बिल में जा घुसे ,अचानक एक फ़क़ीर भेस में आते कोई ऋषि महाराज दिखाई दिए उनको प्यास ज़ोर की लगी थी पानी का कोई इंतज़ाम नहीं था सौभाग्य से मेरे थैले में पानी की बोतल थी जिसमें थोड़ा पानी बचा था उनको दिया उनकी सांस आई .
उन्होंने मेरे जंगल आने का सबब पूछा मेने बताया कहने लगे कहाँ ढूँढ रहे हो जय पुकारने वाले को उपासना, इबादत और पूजनीय को अरे बाबा अपने अंदर ही तलाश कर तेरी आँख में जिसने रौशनी दी , दिल में धड़कन दी, हाथ पाऊं में शक्ति दी . जिसने एक ही ज़मीन से कई प्रकार के फल ,फूल ,फसलें और जड़ी बूटियां पैदा की जो आसमान को बिना किसी टेकी के टांग दिया है जिसके हुक्म से सूरज निकलता है डूबता है जो बादल के ज़रिये पानी बरसाता है , समुन्द्र में जंगलों में ज़मीन के नीचे कैसे कैसे जानवर पशु पक्षी मानव पैदा करता है , इन सबके बनाने वाला और इन सबको रोज़ी पहुंचाने वाला उनकी बोली और फर्याद को सुनने वाला ही ,केवल जय जय कार का हक़दार है ……
मेरी आँख खुल गयी और फिर इस बात कि ज़रुरत महसूस न हुई कि जय के नाम पर किसी बहस या सियासत में पड़ा जाए और शायद अब आपको भी जररूरत नहीं होगी , ओह मगर आपमें से कुछ लोगों के सीने पर तो मोहर लगादी गयी है ,और मौत के ही बाद मालूम होगा कि किसकी बड़ाई (किब्रियाई) और जयजय कार बोलनी थी और किसकी बोलकर और बुलवाकर आगये ।Ali Aadil Khan Editor-In -Chief