मसूरी, 07 अक्टूबर । शरदोत्सव-2026 के दूसरे दिन बुधवार को मसूरी लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर रही। लंढौर चौक, गांधी चौक, गढ़वाल टैरेस और टाउनहाल में दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। उत्तराखंड के साथ हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और हरियाणा से पहुंचे कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विविधता को एक मंच पर प्रस्तुत किया। कार्यक्रमों में लोकगीत, लोकनृत्य और नृत्य नाटिका के साथ आधुनिक संगीत की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
गढ़वाल टैरेस पर लोक गायक राम कौशल ने रेणुका माता के भजन से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘रांसु लगे चौता’, ‘बंदोला-बंदोला’ और ‘चल बीनू मेरा मुलक’ सहित विभिन्न लोकगीत प्रस्तुत किए। इसी स्थल पर नंदादेवी राजजात यात्रा पर आधारित नृत्य नाटिका भी प्रस्तुत की गई, जिसमें उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और लोक परंपरा को दर्शाया गया।
गांधी चौक पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र की ओर से हिमाचल प्रदेश के कलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नाटी प्रस्तुत की। गढ़वाल टैरेस पर कश्मीर के कलाकारों ने कश्मीरी लोकनृत्य और गांधी चौक पर हरियाणा की टीम ने लोकगीत एवं नृत्य प्रस्तुत किए। प्रमिला पंवार के झुमैलों ग्रुप ने मांगल गीत और विभिन्न पहाड़ी नृत्यों की प्रस्तुति दी।
टाउनहाल में स्थानीय क्लब और स्वजन शिक्षा समिति की ओर से भी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया।
इससे पहले शरदोत्सव के तहत सुबह फिटनेस कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लोगों को नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया।
शरदोत्सव की सांस्कृतिक शाम में पांडवाज बैंड ने टाउनहाल में उत्तराखंड के लोक संगीत को आधुनिक अंदाज में पेश किया। पहाड़ की लोकधुनों, लोक कथाओं और पारंपरिक संगीत को आधुनिक वाद्ययंत्रों एवं प्रस्तुति शैली के साथ प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और युवा संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए।
पांडवाज के निर्देशक ईशान डोभाल ने कहा कि उत्तराखंड का लोक संगीत समृद्ध है और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक संगीत को संरक्षित रखने के साथ उसे आधुनिक तकनीक और युवाओं की पसंद से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
डोभाल ने कहा कि पांडवाज की प्रस्तुतियों में उत्तराखंड की लोकधुनों के साथ पहाड़ का जीवन, परंपराएं और लोकविश्वास भी शामिल रहते हैं। मसूरी शरदोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से उत्तराखंड के लोक संगीत को स्थानीय लोगों के साथ देशभर से आए पर्यटकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
शरदोत्सव के दूसरे दिन मसूरी के प्रमुख चौक और सांस्कृतिक स्थल देर शाम तक लोकगीतों और लोकनृत्यों से गूंजते रहे। विभिन्न राज्यों के कलाकारों की प्रस्तुतियों और पांडवाज के आधुनिक संगीत ने आयोजन में लोक एवं समकालीन संस्कृति का मेल प्रस्तुत किया।

