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क्या ईरान ट्रम्प को मारना चाहता है?

क्या ईरान ट्रम्प को मारना चाहता है?

Edited by Ali Aadil khan

ईरान से ख़तरे के बीच ट्रंप की गुप्त उड़ान, एयर फ़ोर्स वन बना ‘डिकॉय’!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद असाधारण और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, जुलाई में तुर्की में हुए NATO शिखर सम्मेलन से लौटते समय ट्रंप को ईरान की कथित हत्या की साज़िश से बचाने के लिए एक बेहद गुप्त ऑपरेशन के तहत उनका विमान बदल दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी अधिकारियों को ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी कि ईरान या उससे जुड़े प्रॉक्सी समूह राष्ट्रपति ट्रंप को ले जा रहे विमान को निशाना बना सकते हैं। CBS News ने पहले ही अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया था कि राष्ट्रपति के विमान पर मिसाइल हमले की एक विश्वसनीय धमकी का पता चला था।

लेकिन अब सामने आई विस्तृत जानकारी से पता चलता है कि मामला सिर्फ़ एक विमान बदलने तक सीमित नहीं था। ट्रंप को असल में एक गुप्त सैन्य विमान से तुर्की से बाहर निकाला गया, जबकि दुनिया को यह दिखाया गया कि वह सामान्य तरीके से Air Force One से ही रवाना हुए हैं।

कैमरों के सामने Air Force One… लेकिन ट्रंप उसमें थे ही नहीं

NATO सम्मेलन के बाद अंकारा एयरपोर्ट पर ट्रंप सार्वजनिक रूप से पुराने Air Force One में सवार होते दिखाई दिए। वहां मौजूद कैमरों और पत्रकारों के लिए यह एक सामान्य राष्ट्रपति प्रस्थान जैसा ही था। लेकिन इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने बेहद गोपनीय तरीके से योजना को अंजाम दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक़, ट्रंप को एयरपोर्ट पर इस्तेमाल होने वाले एक ऊंचे कैटरिंग ट्रक के जरिए उस विमान से बाहर निकाला गया। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट के दूसरे हिस्से में खड़े एक छोटे अमेरिकी सैन्य विमान C-32A तक पहुंचाया गया

यानी जिस विमान को देखकर पत्रकार और अन्य लोग यह समझ रहे थे कि राष्ट्रपति उसमें मौजूद हैं, वह वास्तव में एक तरह का डिकॉय यानी ध्यान भटकाने वाला विमान बन चुका था।

पत्रकारों और कुछ अधिकारियों को भी नहीं थी जानकारी

इस ऑपरेशन की सबसे दिलचस्प बात इसकी गोपनीयता थी। रिपोर्ट के मुताबिक़, ट्रंप के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी इस बदलाव की जानकारी नहीं दी गई थी। वे उसी विमान पर मौजूद रहे जिसे राष्ट्रपति का विमान समझा जा रहा था।

वहीं ट्रंप को दूसरे विमान से ब्रिटेन के RAF Mildenhall एयरबेस ले जाया गया। दोनों विमान बाद में ब्रिटेन पहुंचे और इसके बाद राष्ट्रपति की यात्रा आगे जारी रही।

नया क़तरी विमान क्यों बना चिंता की वजह?

इस पूरे घटनाक्रम का एक अहम पहलू वह नया Boeing 747-8 विमान भी है, जो क़तर की ओर से अमेरिका को दिया गया था और जिसे राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा था।

ट्रंप इसी नए विमान से NATO सम्मेलन के लिए तुर्की पहुंचे थे। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने उसकी सुरक्षा क्षमताओं को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती। पुराना Air Force One राष्ट्रपति सुरक्षा के लिए लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली विशेष तकनीकों से लैस था, जबकि नया विमान अभी पूरी तरह उसी स्तर पर तैयार नहीं हुआ था।

यही वजह है कि तुर्की से वापसी के दौरान पुराने विमान का इस्तेमाल पहले से ही सवालों के घेरे में था। उस समय ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से विमान बदलने की वजह को सुरक्षा ख़तरे से जोड़ने से इनकार किया था और इसे अलग अंदाज़ में पेश किया था। लेकिन बाद में सामने आई खुफिया जानकारी ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नया अर्थ दे दिया।

ट्रंप बोले—जिस विमान में गया, वही ज़्यादा ख़तरे में था

अब इस मामले में खुद डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है। 12 अगस्त को ट्रंप ने कहा कि जिस विमान से उन्हें बाद में तुर्की से बाहर ले जाया गया, उसके निशाने पर आने का जोखिम वास्तव में ज़्यादा था

उनके इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि अगर राष्ट्रपति को एक विमान से दूसरे विमान में गुप्त रूप से इसलिए भेजा गया था कि उन्हें संभावित हमले से बचाया जा सके, तो सवाल यह है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के पास ईरान की धमकी को लेकर कितनी गंभीर खुफिया जानकारी थी।

ईरान को लेकर ट्रंप पहले भी जता चुके हैं डर

NATO सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने ईरान से अपनी जान को ख़तरे की बात कही थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि वह ईरान के लिए “नंबर वन निशाना” हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव पहले से ही बेहद गंभीर स्थिति में था। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की आवाजाही और विमान की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी एजेंसियों की अतिरिक्त सतर्कता स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना ज़रूरी है कि ईरान की ओर से इस कथित साज़िश के बारे में कोई स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध रिपोर्टें अमेरिकी अधिकारियों और सुरक्षा सूत्रों की जानकारी पर आधारित हैं।

व्हाइट हाउस ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस ने इस पूरे गुप्त ऑपरेशन के हर विवरण की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से इतना ज़रूर कहा गया है कि राष्ट्रपति को लगातार गंभीर ख़तरों का सामना है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उपलब्ध सभी आवश्यक उपाय किए जाते हैं। अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ी विशिष्ट प्रक्रियाओं पर टिप्पणी करने से इनकार किया है।

यही वजह है कि इस घटना के कई ऑपरेशनल विवरण अभी भी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

इस घटना का बड़ा मतलब क्या है?

ट्रंप की तुर्की से गुप्त रवानगी सिर्फ़ एक राष्ट्रपति की सुरक्षा का मामला नहीं है। यह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की गंभीरता को भी दिखाती है।

एक तरफ़ अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और धमकियों का दौर जारी है, दूसरी तरफ़ अमेरिकी राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर ऐसी गोपनीय रणनीति अपनाई जा रही है जिसमें उनके साथ यात्रा करने वाले पत्रकारों तक को वास्तविक विमान की जानकारी नहीं दी जाती।

सबसे अहम सवाल यही है—

क्या अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को ईरान की ओर से ट्रंप पर हमले की ऐसी विश्वसनीय जानकारी मिली थी, जिसके कारण राष्ट्रपति को सार्वजनिक रूप से एक विमान में दिखाकर गुप्त रूप से दूसरे सैन्य विमान से बाहर निकालना पड़ा?

और अगर ऐसा था, तो यह मामला अमेरिका-ईरान तनाव के उस स्तर की ओर इशारा करता है जहां अब सिर्फ़ सैन्य ठिकाने और रणनीतिक संपत्तियां ही नहीं, बल्कि दुनिया की एक बड़ी सैन्य शक्ति के राष्ट्रपति की व्यक्तिगत सुरक्षा भी संभावित निशाने के तौर पर देखी जा रही है

फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने इस पूरे ऑपरेशन की पूरी तस्वीर सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन तुर्की से ट्रंप की यह गुप्त उड़ान एक बात साफ़ करती है—

ईरान को लेकर वॉशिंगटन की सुरक्षा चिंताएं महज़ बयानों तक सीमित नहीं थीं; उनका असर अमेरिकी राष्ट्रपति की आवाजाही की गोपनीय योजना तक पहुंच चुका था।

sources:  Reuters, Associated press, cbs news, washington post

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