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जन्म-मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने में हुई देरी तो बढ़ेगी मुश्किल

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नजमुद्दीन फ़ारूक़ी की रिपोर्ट

जनहित में जारी ज़रूरी जानकारी

जन्म-मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराने में देरी हुई तो मुश्किल बढ़ेगी, मोदी सरकार ने पंजीकरण (Registration) के नियमों को बहुत सख्त कर दिया गया है।

1 अक्टूबर 2026 से जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन के बारे में मोदी सरकार ने नए नियम बनाये हैं. इसके पीछे सरकार की मंशा पर कोई अवामी चर्चा नहीं है. गृह मंत्रालय के तहत भारत के रजिस्ट्रार जनरल की अधिसूचना S.O. 5081(E) के अनुसार, जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) अधिनियम, 2026, 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा

मोदी सरकार ने जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों को और सख्त करने की पूरी तैयारी कर ली है. जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026 को 29 जुलाई को राज्यसभा और 31 जुलाई को लोकसभा में पास करा लिया गया था. संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह विधेयक कानून बन चूका है

सबसे ज़रूरी बात यह है कि हर जन्म, मृत जन्म (stillbirth) और मृत्यु की जानकारी घटना के 21 दिनों के भीतर दी जानी चाहिए।

देरी होने पर आपको क्या क्या दिक्कतें हो सकती हैं ? 
* 30 दिनों तक: तय लेट फीस के साथ रजिस्ट्रेशन की अनुमति है।
* 30 दिनों से ज़्यादा लेकिन 1 साल के भीतर: रजिस्ट्रेशन के लिए तय अधिकारी की लिखित अनुमति और लागू फीस की ज़रूरत होगी।
* 1 साल के बाद लेकिन 2 साल के भीतर: रजिस्ट्रेशन के लिए वेरिफिकेशन और तय फीस के भुगतान के बाद DM या SDM के आदेश की ज़रूरत होगी।
* 2 साल के बाद: रजिस्ट्रेशन के लिए वेरिफिकेशन और तय फीस के भुगतान के बाद फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश की ज़रूरत होगी।

कृपया ध्यान दें, अस्पतालों, नर्सिंग होम या अन्य मेडिकल संस्थानों में होने वाली घटनाओं के मामले में, संबंधित रजिस्ट्रार को 21 दिनों के भीतर घटना की जानकारी देने की ज़िम्मेदारी संस्थान की है।

समय पर रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित करने में स्थानीय निकायों/नगर निगमों और उनके तय रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की भी अहम भूमिका होती है। 

किसी भी सवाल या ज़्यादा जानकारी के लिए, आप 9956287442 मोबाइल नम्बर पर सुबह 11:00 बजे से रात 10:00 बजे के बीच N A Farooqi साहब से संपर्क कर सकते हैं।

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