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जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अध्यादेश का उल्लंघन अफ़सोसनाक

Jamia mIllia Islamia University

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प्रेस विज्ञप्ति

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में उर्दू से जुड़े अध्यादेश का उल्लंघन उर्दू दुनिया के लिए अफ़सोस नाक: डॉ. सैयद अहमद ख़ान

जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे ऐतिहासिक संस्थान में एक मजबूत उर्दू विरोधी लॉबी काम कर रही है ?

Dr sayed ahmed khan urdu development organisation

नई दिल्ली।उर्दू डेवलेपमेंट आर्गेनाइजेशन(यूडीओ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद अहमद खान ने एक बयान में इस मामले पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया की अकादमिक परिषद ने पूर्व कुलपति नजीब जंग के समय एक अध्यादेश पारित किया था . जिसका मकसद जामिया में उर्दू के अंकों को अनिवार्य अंग्रेजी के समकक्ष ग्रेड में जोड़ने का आदेश जारी किया गया था।

लेकिन यह अध्यादेश आज तक लागू नहीं हो सका है.जामिया के अध्यादेश कहता है कि अनिवार्य उर्दू के अंक, अनिवार्य अंग्रेजी की तरह ग्रेड में जोड़े जाएंगे, लेकिन वर्षों से अनिवार्य उर्दू को क्वालिफाइंग नेचर का बना दिया गया है.इसका परिणाम यह होता है कि छात्र अनिवार्य उर्दू को गंभीरता से नही लेते हैं और वे कक्षा में उपस्थित होना एक मजबूरी समझते हैं।

डॉ. सैयद अहमद खान ने कहा कि ऐसा लगता है कि जामिया मिलिया इस्लामिया जैसे ऐतिहासिक संस्थान में एक मजबूत उर्दू विरोधी लॉबी काम कर रही है।उर्दू डेवलेपमेंट आर्गेनाइजेशन (UDO) की मांग है कि वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़े इस अध्यादेश को तुरंत लागू किया जाए .  भारत के बुनियादी तहज़ीब को ज़िंदा किया जाए और उर्दू प्रेमीयों की भावनाओं को आहत न किया जाए .

उर्दू पर ज़ुल्म मुस्लमान समझकर न किया जाए , क्योंकि उर्दू मुसलमनों की नहीं बल्कि हिंदुस्तान की ज़बान है .जामिया मिल्लिया इस्लामिया एडमिनिस्ट्रेशन इस अहम् मुद्दे पर ग़ौर करे और उर्दू डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (UDO) की मांग है कि इस अध्यादेश को जामिया का असासा समझकर लागु किया जाए . उर्दू डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन और पूरी उर्दू बरादरी , जामिया मिल्लिया इस्लामिया एडमिनिस्ट्रेशन और इन्तज़ामिया की ममनून रहेगी .

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