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जब वो टूट गया, तो यह बिखर गयी

Ali Aadil khan

Ali Aadil Khan Editor's Desk

 

दुनिया में रिश्तों की डौर को विश्वास और यकीन के साथ जोड़ा  गया है ,धरती पर सबसे पहला रिश्ता माँ और औलाद का शुरू होता है ,बन्दा सबसे पहले अपने रब से जुड़ता है रब बन्दे की तमाम ज़रूरतों को असबाब के बिना तीन काली कोठरियों में पूरी कर रहा होता है जहाँ सांसारिक कोई माध्यम नहीं होता, दुनिया में आते ही इंसान का सम्बन्ध असबाब से जोड़ दिया जाता है मगर असबाब में कंट्रोल उसी का बना रहता है वो जब चाहता है चीज़ों में नफा और नुकसान रख देता है यानी जब जब बन्दे का रिश्ता जिसको यकीन भी कहते हैं अपने बनाने वाले से बना रहता है तब तक तमाम मख्लूक़ (योनियाँ ) इसको लाभ पहुंचाती रहती हैं ज्यों ही इसका विश्वास या रिश्ता अपने बनाने वाले से टूट जाता है तो मामूली सी जीव यानी मच्छर भी इसकी मौत और नुकसान का सबब बन जाता है नमरूद की मिसाल हमारे सामने है जो दुनिया में खुद को खुदा कहलवाता था । एक मच्छर ही उसकी नाक में घुसा था जिससे उसकी मौत हुई।

 

आपको याद होगा पिछले दिनों एक टीवी सीरियल आर्टिस्ट प्रत्युष बनर्जी के बॉय फ्रेंड राहुल राज पर यह इलज़ाम है की उसने प्रत्युष को फँसी लगाने पर मजबूर किया था मुक़द्दमा कोर्ट पहुंचा राहुल ने अपने वकील के रूप में मशहूर अधिवक्ता नीरज गुप्ता को चुना वकालत नामा भर दिया गया अचानक नीरज गुप्ता ने राहुल का मुक़द्दमा लड़ने से मना कर दिया, इसके पक्ष और विपक्ष में टिप्पणियां अख़बारों में आना शुरू होगईं लेकिन यहाँ विशवास टूटा और आशा टूटी राहुल राज की ज़िंदगी इस बात से कितनी प्रभावित होगी कहना मुश्किल होगा किन्तु वकील और मुद्दई के बीच का विशवास ज़रूर घात हुआ।याद दिला दें गांधी जी ऐसे केस ही नहीं लेते थे जिसमें पीड़ित के साथ अन्याय हो।

 

हालाँकि केस फिक्सिंग के कई मामलात सामने आ चुके हैं मगर यह भी सच है की दर्जनों आरोपियों  को १२ और १३ वर्षों के बाद माननीय कोर्ट ने यह कहकर बाइज़्ज़त बरी किया है की मुल्जिमान पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है ।इन्साफ की उम्मीद और विश्वास पर मुल्ज़िम  और अदालत के बीच रिश्तों की इस डोर को देश की जनता ने अभी तक भी क़याम रखा है अगर सांप्रदायिक ताक़तों ने इस विशवास को तोड़ दिया तो देश की जनता बिखर जायेगी और मुल्क अराजकता का शिकार होजायेगा।जिस डगर पर देश रफ्ता रफ्ता बढ़ता नज़र आ रहा है ।

 

रब ने बन्दे को माँ के पेट से निकालकर किसी सरकार या कोई और वयवस्था के हवाले नहीं किया बल्कि माँ की गोद और ममता के बीच रखा जो रब की ममता और दुलार के बाद NO .2  पर आती है ।इसके बाद अब  दूसरे रिश्ते शुरू  होगये और हर एक को विश्वास की डोर से बाँध दिया जैसे भाई बहिन का रिश्ता  , पति पत्नी का रिश्ता  , नियोक्ता और कर्मचारी के बीच का रिश्ता , सरकार और अवाम का रिश्ता ,  इन सब रिश्तों में विश्वास बहुत एहम होता है, अगर यह टूटा तो ज़िंदगियाँ बिखर जाती हैं दरअसल इन रिश्तों में लोभ , स्वार्थ और  अहंकार आड़े आजाता है तो यह टूट जाते हैं , इसी बीच एक बात और एहम होती है वो है अधिकार और कर्तव्यों का ताल मेल , जब लोग अपने अधिकार लेने और कर्तव्यों से बचने की नीयत करते हैं तो ये रिश्ते टूट जाते हैं। और जब रिश्ते टूट जाते हैं तो जिन्दिगियां बिखर जाती हैं।

 

देश और ज़िंदगियों को बिखरने से बचाने के लिए कर्तव्यों और अधिकारों के ताल मेल के साथ सरकारों और जनता को आगे बढ़ना चाहिए ।साथ ही यदि नेताओं और सियासी पार्टियों ने वोट धुर्वीकरण की घटया नीती और नीयत को नहीं बदला तो बढ़ते सांप्रदायिक माहौल के चलते देश की स्तिथि अफ्रीकी देशों से बदतर होजायेगी और कुदरती आफ़ात के घेरे में भी आजायेगी ।अली आदिल खान ,एडिटर इन चीफ़ टाइम्स ऑफ़ पीडिया

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