Edited by Ali Aadil Khan
INDIA गठबंधन की बैठक: वोट के सवाल पर विपक्ष का सरकार और चुनाव आयोग पर हमला
बुधवार को दिल्ली में हुई INDIA गठबंधन की बैठक महज विपक्षी दलों की औपचारिक बैठक बनकर नहीं रह गई। बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा रहा—मतदाता सूची, SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव और नामों को लेकर उठे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। Reuters के मुताबिक, गठबंधन ने इन मुद्दों को लेकर देशभर में आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई के रूप में पेश किया है।
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी प्रमुख मुद्दा रही। विपक्ष ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग के सामने जवाबदेही और पारदर्शिता का प्रश्न खड़ा किया। INDIA गठबंधन ने आगे जिला स्तर पर प्रदर्शन, चुनाव आयोग तक मार्च और दिल्ली में बड़ी रैली जैसे कार्यक्रमों का रोडमैप घोषित किया है।
सत्ता पक्ष का कहना है कि विपक्ष चुनावी हार की जमीन तैयार कर रहा है और चुनाव आयोग पर सवाल उठाकर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रहा है। बीजेपी नेताओं ने INDIA गठबंधन की बैठक को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी और आरोप लगाया कि विपक्ष के पास कोई ठोस राजनीतिक दृष्टि नहीं है।
लेकिन असली सवाल यह है—अगर मतदाता सूची को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है, तो सरकार और चुनाव आयोग को इन सवालों का जवाब आंकड़ों और दस्तावेजों के साथ देने में परेशानी क्यों ?
लोकतंत्र में चुनाव जीतना ही पर्याप्त नहीं होता; चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा भी उतना ही जरूरी है। सत्ता पक्ष अगर विपक्ष के सवालों को केवल राजनीतिक शोर कहकर खारिज करता है, तो इससे सवाल खत्म नहीं होते। उसी तरह विपक्ष के आरोप भी तब तक अंतिम सत्य नहीं माने जा सकते, जब तक उनके दावों की स्वतंत्र और संस्थागत जांच न हो।
यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
सवाल INDIA गठबंधन बनाम BJP का नहीं, सवाल उस मतदाता के वोट का है—जिसका नाम सूची में है या नहीं है, और जिसे अपने वोट के अधिकार पर भरोसा होना चाहिए।
और अगर चुनावी लोकतंत्र में वोटर ही पूछने लगे कि “मेरे वोट का हिसाब कौन देगा?”, तो सत्ता और विपक्ष—दोनों के लिए उस सवाल का जवाब देना जरूरी हो जाता है।

