जयपुर, 27 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल प्रहरी भर्ती-2024 में अधिक अंक लाने के बावजूद आपराधिक प्रकरण छिपाने के आधार पर नियुक्ति नहीं देने पर कर्मचारी चयन बोर्ड सचिव और डीजी जेल से जवाब मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने ओबीसी वर्ग का एक पद रिक्त रखने के आदेश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश विकम विशनोलिया की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता सुनील सिंगोदिया ने अदालत को बताया की कर्मचारी चयन बोर्ड ने 11 दिसंबर, 2024 को जेल प्रहरी के पदों पर भर्ती निकाली थी। जिसमें याचिकाकर्ता ने शामिल होकर ओबीसी वर्ग की मेरिट में स्थान प्राप्त किया। इसके बाद उसे दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। याचिका में कहा गया कि गत 6 अगस्त को विभाग ने अस्थाई नियुक्ति आदेश जारी किए, लेकिन याचिकाकर्ता का नाम इस आदेश में शामिल नहीं किया। याचिकाकर्ता की ओर से प्रार्थना पत्र पेश करने पर विभाग ने जानकारी दी कि उसने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरण की जानकारी नहीं दी है। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता को अदालत ने उसे दोषसिद्ध कर परिवीक्षा का लाभ दिया गया था। अदालत ने भी अपने आदेश में लिखा था कि परिवीक्षा के तहत दोषसिद्धि के कारण वह किसी निर्योग्यता से ग्रस्त नहीं होगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट भी तय कर चुका है कि यदि परिवीक्षा का लाभ दिया गया है तो ऐसे प्रकरण के बारे में आवेदन पत्र में खुलासा किया जाना जरूरी नहीं है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए भर्ती में ओबीसी वर्ग का एक पद रिक्त रखने को कहा है।

