जोधपुर, 09 सितम्बर । राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मुन्नूरी लक्ष्मण तथा चंद्रशेखर शर्मा के द्वारा पश्चिमी राजस्थान के महाकुंभ बाबा रामदेव जी के मेले में अव्यवस्थाओं व अपर्याप्त चिकित्सकीय सेवाओं के संबंध में जनहित याचिका की सुनवाई कर अंतिम निर्णय देते हुए संभागीय आयुक्त, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जैसलमेर, अतिरिक्त निदेशक, चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग की कमेटी बनाकर शीघ्र कानून व्यवस्था, साफ सफाई तथा यात्रीगण के लिए दिनचर्या की सुविधाएं उपलब्ध करवाने आदि निर्देशित किया है।
उल्लेखनीय है मेले रोज एक्सीडेंट्स, लूटपाट महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अशोक छंगाणी द्वारा न्यायालय में बताया गया कि प्रतिदिन तीन लाख श्रद्धालु मेले में सम्मिलित होकर रामदेवरा पहुंच रहे हैं तथा प्रशासन की ओर से पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की गई हैं। भक्तों के लिए दैनिक दिनचर्या से संबंधित आधारभूत ढांचा कमजोर है तथा चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इसके चलते श्रदालुओं के साथ धोखाधड़ी कर कई व्यक्ति व दुकानदार दर्शन के नाम पर पैसे वसूल रहे हैं व पुलिस द्वारा उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
पुलिस मूक दर्शक बन अप्रत्क्ष रूप से समर्थन दे रही है। अस्थायी टैंट वॉशरूम के साथ भी नहीं बनाए गए है। धर्मशालाएं और होटल्स में अग्निशमन यंत्र भी नहीं लगे है। न ही सीसीटीवी कैमरा रामदेवरा में विभिन्न स्थानों पर पार्किंग के नाम पर मनमानी राशि वसूल की जा रही है। याचिकाकर्ता के वकील अशोक छंगाणी को सुन
न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं।
(1) संभागीय आयुक्त, जोधपुर की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाए, जिसमें निम्न सदस्य होंगे :
जिला कलेक्टर, जैसलमेर;
जिला पुलिस अधीक्षक, जैसलमेर;
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जैसलमेर; तथा
निजी ट्रस्ट के अध्यक्ष।
(2) उक्त समिति को श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं, विशेष रूप से स्वच्छता, चिकित्सा/स्वास्थ्य सेवाओं तथा कानून एवं व्यवस्था से संबंधित आवश्यकताओं का ध्यान रखना होगा तथा उपर्युक्त बुनियादी अवसंरचना/सुविधाओं के निर्माण/व्यवस्था के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। यह व्यवस्था एक माह की अवधि तक अथवा श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने तक, जो भी परिस्थिति लागू हो, की जाएगी।
(3) आवश्यक बुनियादी अवसंरचना तैयार करने में समिति को राज्य सरकार आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।
(4) समिति तत्काल बैठक बुलाएगी और आवश्यक कदम तत्काल प्रभाव से उठाएगी। निर्णय यथासंभव शीघ्र लिया जाएगा और यह कार्रवाई आज से एक सप्ताह से अधिक अवधि के भीतर नहीं की जाएगी।
इस आदेश की एक प्रति संभागीय आयुक्त, जोधपुर को भी भेजे जाने/परिचालित किए जाने के निर्देश दिए जाते हैं।

