जयपुर, 03 नवंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि परिवहन विभाग बिना वैध अधिसूचना के दूसरे राज्यों की गैर परिवहन कार-जीप पर टैक्स वसूलने की कार्रवाई नहीं कर सकता। वहीं अदालत ने दूसरे राज्यों की प्राइवेट कार-जीप के राजस्थान में 30 दिन से ज्यादा संचालन पर परिवहन विभाग की ओर से की गई कार्रवाई को अवैध करार दिया है।
सीजे संजय के. अग्रवाल और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने यह आदेश हार्पी कोर नेटवर्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड सहित करीब 90 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं से टैक्स के तौर पर वसूली गई राशि 30 दिन में परिवहन विभाग वापस करे और उनके जब्त वाहनों को भी तुरंत रिलीज करें। इस मामले में कई वाहन मालिकों की निजी कारें राजस्थान के बाहर के राज्यों में रजिस्टर्ड थी। इनमें हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश व अन्य राज्यों के वाहन शामिल थे। इन वाहनों का संबंधित राज्यों में रजिस्ट्रेशन था और उन पर लाइफटाइम टैक्स भी जमा किया हुआ था, लेकिन जब ये वाहन प्रदेश में चल रहे थे तो परिवहन विभाग की उडऩदस्ते टीम ने कई वाहनों को रोककर कार्रवाई की थी। परिवहन विभाग का कहना था कि दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी वाहन राजस्थान में 30 दिन से अधिक समय तक रखे जा रहे हैं। वाहन मालिकों ने राजस्थान में निर्धारित रोड टैक्स जमा नहीं किया। इसलिए राजस्थान मोटर वाहन कराधान अधिनियम-1951 के तहत इन वाहनों पर टैक्स बकाया है। दूसरी ओर वाहन मालिकों की दलील थी कि वाहन का रजिस्ट्रेशन और लाइफटाइम टैक्स दूसरे राज्य में पहले जमा है तो राजस्थान में एकमुश्त टैक्स की मांग का कोई आधार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि 10 जुलाई 2024 की अधिसूचना में यात्री वाहनों और माल वाहनों के लिए टैक्स की दरें निर्धारित की थी। गैर-परिवहन निजी कारों के लिए संबंधित धारा में अलग अधिसूचना उपलब्ध नहीं थी। इसलिए मौजूदा अधिसूचना से दूसरे राज्यों में रजिस्टर्ड निजी कारों से एकमुश्त टैक्स नहीं वसूल सकते।

