होर्मुज़ पर ट्रंप को अराघची का जवाब: सार्वजनिक बयान नहीं, मध्यस्थों के औपचारिक जवाब का इंतज़ार
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क, 27 सितंबर 2026: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज़ हो गई हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस सार्वजनिक प्रतिक्रिया को नोट किया है, जिसमें ट्रंप ने ईरान के सात-दिन वाले प्रस्ताव को खारिज करने की बात कही थी। लेकिन ईरान अभी भी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के आधिकारिक और अंतिम जवाब का इंतज़ार कर रहा है।
ईरान ने क्या प्रस्ताव दिया है?
ईरान ने अमेरिका के सामने एक ऐसा रोडमैप रखा है, जिसके तहत कुछ शर्तें पूरी होने पर सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल करने और अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया गया था।
अराघची के मुताबिक, इस योजना में पहले अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव और समुद्री नाकाबंदी में कमी, ईरानी तेल निर्यात पर प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र में युद्धविराम जैसे कदम शामिल हैं। इसके बाद शुरुआती प्रक्रिया में लगभग चार से पांच दिन लग सकते हैं, छठे दिन होर्मुज़ में सामान्य आवाजाही बहाल करने और सातवें दिन अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है।
लेकिन ट्रंप ने क्या कहा?
26 सितंबर को ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी रिपोर्टों के मुताबिक, वॉशिंगटन की प्राथमिकताओं में होर्मुज़ में मुक्त आवाजाही के साथ-साथ ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठोस आश्वासन भी शामिल हैं।
यहीं से दोनों पक्षों की स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
ईरान का कहना है: पहले अमेरिकी सैन्य दबाव, नाकाबंदी और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई हो, फिर होर्मुज़ और परमाणु वार्ता आगे बढ़े।
अमेरिकी पक्ष का कहना है: होर्मुज़ में स्वतंत्र आवाजाही और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर बातचीत समझौते का हिस्सा होनी चाहिए।
फिर अराघची ट्रंप के जवाब का इंतज़ार क्यों कर रहे हैं?
यही इस खबर का सबसे दिलचस्प पहलू है।
ट्रंप का सार्वजनिक बयान अपनी जगह है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री का कहना है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिका का औपचारिक जवाब अभी तेहरान को नहीं मिला है।
यानी ईरान फिलहाल ट्रंप के मीडिया में दिए गए बयान को अंतिम कूटनीतिक जवाब नहीं मान रहा। तेहरान पहले यह देखना चाहता है कि अमेरिका मध्यस्थों के जरिए आधिकारिक तौर पर क्या शर्तें रखता है।
इसका अर्थ यह भी है कि बातचीत का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने भी कहा है कि मध्यस्थों के जरिए हुई बातचीत “positive and constructive” रही है, हालांकि वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया है कि वह जल्दबाज़ी में समझौता करने की स्थिति में नहीं है।
कतर की क्या भूमिका है?
अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत के बजाय फिलहाल मध्यस्थों के माध्यम से संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कतर ने दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचाने में भूमिका निभाई है। अमेरिकी दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर तथा अराघची के बीच भी मध्यस्थता के जरिए बातचीत हुई है।
इसलिए अराघची का मौजूदा रुख मूलतः यह है कि सार्वजनिक बयानों से ज्यादा महत्वपूर्ण वह औपचारिक संदेश है जो मध्यस्थों के जरिए अमेरिका भेजता है।
होर्मुज़ इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा-मार्गों में से एक है। युद्ध और तनाव के कारण यहां समुद्री आवाजाही में बाधा ने पहले ही वैश्विक तेल आपूर्ति और बाजारों पर दबाव डाला है।
इसीलिए होर्मुज़ को लेकर ईरान-अमेरिका विवाद सिर्फ दोनों देशों का द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है। इसका असर खाड़ी देशों, तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल तीन चीज़ें महत्वपूर्ण हैं:
- क्या अमेरिका मध्यस्थों के जरिए अपना औपचारिक जवाब देता है?
- क्या ईरान अपनी मौजूदा शर्तों में कोई बदलाव करता है?
- क्या होर्मुज़ खोलने और परमाणु वार्ता को एक ही समझौते में जोड़ने पर दोनों पक्ष सहमत हो पाते हैं?
अभी उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर कूटनीतिक चैनल सक्रिय हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मूलभूत मतभेद बने हुए हैं। इसलिए ट्रंप की सार्वजनिक अस्वीकृति के बावजूद अराघची का मध्यस्थों के जवाब का इंतज़ार करना यह संकेत देता है कि तेहरान कम-से-कम फिलहाल औपचारिक कूटनीतिक प्रक्रिया को खुला रखना चाहता है।

