नई दिल्ली, 01 सितंबर । केंद्र सरकार ने प्याज की बढ़ती कीमत पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए हैं। सरकार ने नासिक से ‘कांदा एक्सप्रेस’ के जरिए आ रहे प्याज के बफर स्टॉक को चरणबद्ध तरीके से जारी करना शुरू कर दिया है। देश के 19 प्रमुख शहरों में 35 रुपये किलोग्राम की दर से प्याज बेचा जा रहा है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में बताया कि बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और त्योहारी सीजन से पहले उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बफर स्टॉक से प्याज को चरणबद्ध तरीके से जारी करना शुरू कर दिया है।
मंत्रालय ने बताया कि देश में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता है और मौसमी कीमतों के दबाव को नियंत्रित करने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ और सड़क परिवहन के माध्यम से बफर स्टॉक से प्याज को चरणबद्ध और लक्षित तरीके से जारी करना शुरू कर दिया गया है। प्याज की व्यापक उपलब्धता को सुनिश्चित करने के लिए 30 से भी अधिक ट्रक भेजे गए हैं, जिससे 19 शहरों में खुदरा बाजार में हस्तक्षेप के प्रयास काफी बढ़ गए हैं।
मंत्रालय ने कहा कि मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत रखे गए प्याज के बफर स्टॉक से आपूर्ति 24 अगस्त से भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) के जरिए से शुरू हुई है। इसके तहत नासिक से कांदा एक्सप्रेस की दो खेपें भेजी गई हैं। इसमें 450 मीट्रिक टन प्याज की पहली खेप 27 अगस्त को देर रात नई दिल्ली पहुंची। इसमें से 140 मीट्रिक टन प्याज वाराणसी, लखनऊ, चंडीगढ़ और अमृतसर में और बाकी बचा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वितरित किया गया। वहीं, 840 मीट्रिक टन प्याज से लदी दूसरी रेलगाड़ी 31 अगस्त को चेन्नई पहुंची।
सड़क मार्ग से ले लाया जा रहा 1 हजार मीट्रिक टन प्याज
बाजार की मौजूदा स्थितियों और मूल्य के रुझानों के आधार पर उपलब्धता में सुधार लाने और मौसमी मूल्य दबावों को कम करने के उद्देश्य से लगभग 1 हजार मीट्रिक टन प्याज को सड़क मार्ग से प्रमुख उपभोग केंद्रों तक पहुंचाया जा रहा है। प्याज की व्यापक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 19 शहरों में खुदरा बिक्री का विस्तार भी किया गया है, जिसमें ढुलाई के लिए 30 से अधिक ट्रक तैनात किए गए हैं।
मंत्रालय के अनुसार इन शहरों में नई दिल्ली, जयपुर, जम्मू, देहरादून, शिमला, अमृतसर, चंडीगढ़, कोलकाता, गुवाहाटी, लखनऊ , वाराणसी, पटना , भोजपुर (बिहार), बिहार शरीफ (बिहार), भुवनेश्वर, चेन्नई, मदुरै, त्रिशूर और कोच्चि शामिल हैं। वहीं, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने लखनऊ में भी इस खुदरा पहल का शुभारंभ किया है।
खुदरा प्याज 35 रुपये प्रति किलो के भाव से है उपलब्ध
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने कहा कि एनसीसीएफ, एनएएफईडी, केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स और मोबाइल वैन के माध्यम से प्याज की खुदरा बिक्री 35 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से जारी है, जिससे उपभोक्ताओं को किफायती दामों पर प्याज उपलब्ध हो रहा है। अब तक लगभग 669 मीट्रिक टन प्याज की बिक्री हो चुकी है, जिसमें से 223 मीट्रिक टन ई-एनएएम पोर्टल और इसी तरह के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए मौजूदा मंडी कीमतों पर थोक चैनलों के द्वारा और 446 मीट्रिक टन खुदरा केंद्रों द्वारा देशभर में बेची गई है।
बढ़ी हुई उपलब्धता कीमतों को नियंत्रित करने में है सहायक
वाराणसी, अमृतसर, नई दिल्ली और आसपास के बाजारों में बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति शुरू होने से बाजार में उपलब्धता बढ़ी है और कीमतों में कमी आई है। बिक्री शुरू होने के अगले दिन से ही कीमतों में गिरावट देखी गई है, और आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
किसानों को समय पर किया जा रहा है सीधे भुगतान
मंत्रालय ने कहा कि लगभग 3,400 किसानों को सीधे 210 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जिससे समय पर भुगतान सुनिश्चित हुआ है। केंद्र सरकार प्याज किसानों को समर्थन देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त और किफायती उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने रेलगाड़ियों के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्याज के परिवहन और आपूर्ति के दौरान मजबूत सुरक्षा उपाय भी लागू किए हैं।
उपभोक्ता, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से प्रति कार्ड एक किलो प्याज की आवश्यकता के अनुसार वितरित करने की योजना बनाई है। तमिलनाडु के विभिन्न जिलों में प्रस्तावित जिला-वार क्लस्टरिंग के अनुसार प्याज का वितरण शुरू होने की संभावना है। मंत्रालय ने कहा कि प्रमुख उपभोग केंद्रों तक प्याज के बफर स्टॉक की सुनियोजित आपूर्ति शुरू कर दी गई है। इसके लिए रेलगाड़ियों (कांदा एक्सप्रेस) और सड़क परिवहन का हाइब्रिड मॉडल को अपनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना और मौसमी मूल्य दबावों को कम करना है।

