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ग़ाज़ा पर म्लादेनोव की गंभीर चेतावनी

ग़ाज़ा

Edited Ali Aadil Khan

अमेरिका के नेतृत्व वाले Board of Peace के हाई रिप्रेज़ेंटेटिव निकोलाय म्लादेनोव ने ग़ाज़ा की मौजूदा स्थिति को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर ग़ाज़ा में जल्द पुनर्निर्माण, इज़राइली सैन्य वापसी और फ़िलिस्तीनी हथियारबंद समूहों का निरस्त्रीकरण सुनिश्चित नहीं किया गया, तो ग़ाज़ा “हमेशा के लिए ख़त्म” हो सकता है।

म्लादेनोव ने अल जज़ीरा से बातचीत में कहा कि ग़ाज़ा में लगातार बिगड़ती मानवीय परिस्थितियां एक और बड़े सुरक्षा संकट को जन्म दे सकती हैं। उनके मुताबिक़, मौजूदा शांति योजना का विफल होना और दोबारा युद्ध शुरू होना बेहद विनाशकारी होगा।

युद्धविराम पर क्यों बढ़ रहा है संकट?

ग़ाज़ा में अक्टूबर 2025 से लागू युद्धविराम के बावजूद इज़राइली हमलों और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर विवाद जारी है। म्लादेनोव ने चेतावनी दी है कि यदि दोनों पक्ष शांति रोडमैप में किए गए वादों से पीछे हटते हैं, तो युद्धविराम पूरी तरह टूट सकता है और क्षेत्र फिर हिंसा के चक्र में फंस सकता है।

म्लादेनोव की चेतावनी केवल फ़िलिस्तीनी पक्ष के लिए नहीं बल्कि इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों के लिए है। उनका कहना है कि मौजूदा योजना के अलावा कोई बेहतर विकल्प दिखाई नहीं देता।

शांति रोडमैप में क्या है?

म्लादेनोव के प्रस्तावित रोडमैप में कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं:

ग़ाज़ा का बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण
फ़िलिस्तीनी हथियारबंद समूहों का निरस्त्रीकरण
इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी
ग़ाज़ा में International Stabilization Force (ISF) की तैनाती
स्थानीय पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था का पुनर्गठन
ग़ाज़ा के रोज़मर्रा के प्रशासन के लिए एक गैर-पक्षीय फ़िलिस्तीनी तकनीकी समिति

Board of Peace का कहना है कि ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 7 अरब डॉलर की सहायता प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।

ग़ज़ा से इज़राइली वापसी इस पूरी योजना की सबसे बड़ी रुकावट है। Hamas ने रोडमैप को स्वीकार करने की बात कही है और सत्ता से पीछे हटने तथा हथियार छोड़ने की दिशा में सहमति भी जताई है। लेकिन इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का रुख़ अब भी सख़्त है। उनका कहना है कि Hamas के पूरी तरह निरस्त्रीकरण से पहले इज़राइली सेना ग़ाज़ा से वापस नहीं जाएगी।

इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और इज़राइली सैन्य वापसी का सवाल अभी भी अटका हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैयारी

म्लादेनोव ने बताया कि Board of Peace ने ग़ाज़ा में International Stabilization Force की तैनाती के लिए व्यवस्था तय कर ली है। मोरक्को ने इसमें शामिल होने पर सहमति जताई है, जबकि तुर्किये की भागीदारी इज़राइल के विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। उनका कहना है कि इस बल के शुरुआती दल जल्द ग़ाज़ा पहुंच सकते हैं।

इससे पहले Uganda और Burundi समेत कुछ देशों ने भी संभावित सैनिक योगदान को लेकर बातचीत की है। प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय बल का उद्देश्य ग़ाज़ा को स्थिर करना, फ़िलिस्तीनी पुलिस को प्रशिक्षित करना और मानवीय सहायता के वितरण में मदद करना है।

म्लादेनोव की चेतावनी का असली मतलब

म्लादेनोव की “Gaza could be gone for good” वाली चेतावनी सिर्फ़ इमारतों के नष्ट होने की बात नहीं है। उनका संकेत है कि यदि युद्धविराम टूटता है, पुनर्निर्माण रुकता है और राजनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो ग़ाज़ा की सामाजिक और मानवीय संरचना इतनी तबाह हो सकती है कि वहां स्थायी शांति की संभावना भी बेहद मुश्किल हो जाएगी ।
यानी सवाल अब केवल यह नहीं है कि ग़ाज़ा में युद्ध फिर शुरू होगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या ग़ाज़ा को एक रहने योग्य, स्थिर और राजनीतिक रूप से पुनर्गठित क्षेत्र के रूप में बचाया जा सकेगा या नहीं?

म्लादेनोव का संदेश बेहद साफ़ है—समय निकल रहा है। युद्धविराम की विफलता सिर्फ़ एक और युद्ध नहीं होगी, बल्कि ग़ाज़ा के भविष्य को ही बड़ा खतरा हो सकती है।

 

Sources and credits: Al Jazeera और म्लादेनोव के युद्धविराम संबंधी इंटरव्यू/रिपोर्ट
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