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पैरलल लाइसेंस के खिलाफ 40 हजार बिजली कर्मचारी हड़ताल पर

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चंडीगढ़, 22 अक्टूबर । गुरुग्राम व नूंह की बिजली वितरण में निजी कंपनी को पैरलल लाइसेंस देने के खिलाफ बिजली कर्मियों और इंजीनियरों ने गुरुवार से प्रदेश में तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी। कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल को कामयाब करार देते हुए राज्य में इस व्यापक असर बताया है। हड़ताल के दौरान आज संयुक्त किसान मोर्चा के अधिकांश घटक संगठन, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा, मजदूर संगठन सीटू, एटक, इंटक व एआईयूटीयूसी ने जगह-जगह प्रदर्शन किए। इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा और आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि हड़ताल में चारों निगमों के करीब 40 हजार कर्मचारी और इंजीनियर शामिल हैं।शत-प्रतिशत कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने के कारण ब्रेक डाउन हुए 33 व 11 केवी फीडर बंद पड़े हैं। अधिकांश ग्रामीण व शहरी रिहायशी इलाकों में बिजली बंद है, जिसके कारण पानी की बड़ी समस्या पैदा हो रही है। औद्योगिक फीडर बंद होने से औद्योगिक उत्पादन बंद हो गया है। बैंक व बीमा सहित अन्य वित्तीय संस्थानों में बिजली बंद होने से भारी दिक्कतें आ रही है। उपभोक्ताओं की ट्रांसफार्मर से फ्यूज उड़ने और बिजली खराबी की शिकायतों का निवारण नहीं हो रहा है।

शत-प्रतिशत कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने से बिजली शिकायत केन्द्र, सब स्टेशन, सब डिवीजन, डिवीजन और सर्कल कार्यालय सूनसान हैं। हिसार और पंचकूला मुख्यालय में भी हड़ताल का व्यापक असर है और लगभग शत-प्रतिशत कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। इस हड़ताल का आह्वान हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने किया है। जिसमें बिजली के नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की सभी यूनियन तथा अधिकारियों की इंजीनियर एसोसिएशन भी शामिल हैं। सांझा मोर्चा के सदस्य देवेन्द्र सिंह हुड्डा, रविन्द्र घणघस, इकबाल चांदना, बिजेंद्र सिंह बराड़, बलजीत बेनीवाल, सुरेश राठी, यशपाल देसवाल व राजेश सिरोही ने हड़ताल की सफलता का दावा किया और इसके लिए पूरी तरह हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। मोर्चे के वरिष्ठ सदस्य देवेन्द्र सिंह हुड्डा ने कहा कि बिजली कर्मचारी और इंजीनियर अपने वेतन भत्ते बढ़वाने की मांग को लेकर हड़ताल पर नहीं है, बल्कि बिजली को निजी हाथों से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं।

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