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विनेश फोगाट की याचिका पर हाई कोर्ट ने डब्ल्यूएफआई से अपना पक्ष रखने को कहा

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नई दिल्ली, 09 सितंबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने महिला पहलवान विनेश फोगाट की 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय कुश्ती संघ (डब्ल्यूएफआई) को अपना पक्ष रखने को कहा है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने इस मामले पर 17 सितंबर को सुनवाई करने का आदेश दिया।

विनेश फोगाट ने ये नई अर्जी अपनी याचिका में दी है। लंबित याचिका में फोगाट ने अपने गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए एक स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। नई अर्जी में फोगाट ने भारतीय कुश्ती संघ के 7 सितंबर के उस सर्कुलर पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके तहत उसे चयन प्रक्रिया से बाहर रखा गया। नई अर्जी में कहा गया है कि भारतीय कुश्ती महासंघ को दिशा-निर्देश दिया जाए कि फोगाट को फिलहाल पात्र खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया जाए और 14 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने दिया जाए। ये चयन ट्रायल भारत की उस टीम के चयन के लिए है जिसे 24 अक्टूबर से एक नवंबर तक कजाकिस्तान के अस्ताना में होने वाली 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेना है। भारतीय कुश्ती महासंघ के सर्कुलर के मुताबिक 14 सितंबर को दिल्ली में छह ओलंपिक भार वर्गों में महिला पहलवानों के चयन ट्रायल होंगे।

इसके पहले एक सितंबर को उच्च न्यायालय ने विनेश फोगाट की एक दूसरी याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें भारतीय कुश्ती महासंघ को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह महिला एथलीटों के गर्भधारण, बच्चे के जन्म और उसके बाद ठीक होने के समय के बाद खेल प्रतियोगिताओं में वापसी के लिए एक निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित ढांचा लागू करे। विनेश फोगाट ने खुद का हवाला देते हुए कहा है कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने अपना कुश्ती करियर फिर से शुरू किया, तो उन्हें बिना किसी रियायत के सीधे प्रतिस्पर्धा में उतरना पड़ा, जबकि मातृत्व की वजह से वे कुछ समय तक प्रतिस्पर्धा में हिस्सा नहीं ले पाई थीं।

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