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आशुतोष और सौरव दास को एसईएम कोर्ट मिली जमानत, जेल से रिहाई का आदेश

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नई दिल्ली, 21 अक्टूबर । दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित स्पेशल एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों पिछले सात दिनों से न्यायिक हिरासत में थे। आज दोनों की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही थी, जिसके बाद उन्हें स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया।

दोनों की पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने तीन दिन की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन स्पेशल एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने इस मांग को खारिज कर दिया। इससे पहले दोनों ने बुधवार सुबह दिल्ली उच्च न्यायालय से अपनी याचिका वापस ले ली थी। उच्च न्यायालय के जज जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने दोनों को याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए सुझाव दिया था कि वे फिलहाल अपनी याचिका वापस ले लें, क्योंकि स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट आज सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत पर फिर से विचार कर रहा है।

उच्च न्यायालय ने दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील अभिक चिमनी से कहा कि ये ऐसा मामला है, जहां एक एहतियाती नोटिस का उल्लंघन किया गया है और फिर दूसरा एहतियाती नोटिस जारी किया जाता है। वहां जाकर शांति बांड भरा जाता है, फिर उस बांड को तोड़ देता है। यह सही है या नहीं, यह हम बाद में देखेंगे। कोर्ट ने पूछा कि अगर वो बांड तोड़ देता है, तो क्या ऐसी स्थिति में जमानती की मांग करने को क्या पूरी तरह से अवैध या कानून के विरुद्ध माना जा सकता है? न्यायालय ने सुझाव दिया कि उच्च न्यायालय जाने से पहले वे अपीलीय अदालत का रुख करें।

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने आशुतोष रांका और सौरव दास की की उम्र पूछी। इसके बाद न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये दोनों जेन-जी नहीं हैं, क्योंकि एक ने अपनी उम्र 27 साल बताई तो दूसरे ने 31 साल। न्यायालय ने कहा कि पहले यह छात्रों का प्रदर्शन था, इसमें बच्चे भी शामिल थे, लेकिन अब प्रदर्शन का मुद्दा बदल गया है। न्यायालय ने कहा कि लोग वही हैं, लेकिन अब प्रदर्शन का मकसद बदल गया है। आप कौन हैं, किस संगठन से जुड़े हैं और उस संगठन का मकसद क्या है। जब शांति भंग होने का डर हो, तब इन सवालों का जवाब जानना जरूरी हो जाता है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे समूह जिनके मुद्दे और उद्देश्य समय-समय पर बदलते रहते हैं, उनके बारे में सवाल उठता है कि क्या मजिस्ट्रेट को शांति भंग होने की आशंका पर विचार करते समय इन पहलुओं को देखना चाहिए।

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