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लम्पी से गोवंश सुरक्षा को अयोध्या में एक माह का विशेष टीकाकरण अभियान शुरू

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अयोध्या, 14 सितंबर । अयोध्या जिले में लम्पी स्किन डिजीज से पशुओं को बचाने के लिए 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक एक माह का विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।

अभियान के तहत जिले में 72 हजार वैक्सीन पहुंच चुकी हैं। टीकाकरण के लिए 29 टीमें तैनात की गई हैं। प्रत्येक टीम में पांच सदस्य हैं, जो गांव-गांव जाकर गोवंश और महिषवंश का टीकाकरण कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालक लम्पी से अपने पशुओं का टीकाकरण कराने के लिए 1962 नंबर पर कॉल कर सकते हैं।

पशुपालन विभाग के अधिकारी नियमित रूप से गांवों का दौरा कर टीकाकरण की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं। अभियान के सफल संचालन के लिए पर्याप्त वैक्सीन और प्रशिक्षित टीमें उपलब्ध कराई गई हैं।

जिले में गोवंश से अधिक है महिषवंशीय पशुओं की संख्या

जिले में अब तक 41620 पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। अयोध्या जिले में कुल 4.39 लाख पशु हैं। इनमें गोवंशीय पशुओं की संख्या 1,36,691 तथा महिषवंशीय पशुओं की संख्या 3,02,358 है। प्रशासन का लक्ष्य है कि अभियान अवधि में अधिक से अधिक पशुओं को लम्पी वायरस से सुरक्षा प्रदान की जाए।

क्या है लम्पी वायरस?

लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय-भैंसों को प्रभावित करती है। यह कैप्रीपॉक्स वायरस समूह का सदस्य है। संक्रमित पशु के शरीर पर गांठें (नोड्यूल्स) बन जाती हैं, बुखार आ जाता है, दूध उत्पादन में भारी गिरावट होती है और कभी-कभी मौत भी हो जाती है। यह रोग मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और अन्य कीटों के काटने से फैलता है। संक्रमित पशु के संपर्क और दूषित सामान से भी संक्रमण हो सकता है। समय पर टीकाकरण से इस बीमारी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

हेल्पलाइन पर संपर्क कर करवा सकते हैं टीकाकरण

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी अयोध्या डा. इन्द्र देव महर ने बताया कि यह अभियान न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करेगा, बल्कि किसानों और पशुपालकों की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। लम्पी से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पशुपालक 1962 हेल्पलाइन पर संपर्क कर अपनी सुविधा के अनुसार टीकाकरण करवा सकते हैं।

*प्राथमिक घरेलू उपचार*

लम्पी स्किन डिसीज एक वायरल बीमारी है, लेकिन सही प्राथमिक देखभाल और घरेलू उपायों से पशु को राहत दिलाई जा सकती है। नीम की पत्तियाँ उबालकर पशु को नहलाएं, हल्दी का लेप लगाएं और फिटकरी के घोल से शरीर पोंछें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गुड़, हल्दी व लहसुन दें और तुलसी का रस पिलाएं। पशु को साफ पानी, पौष्टिक चारा दें तथा बाड़े की स्वच्छता बनाए रखें। नजदीकी पशु चिकित्सक से जरूर संपर्क करें।

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