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Adv.महमूद पराचा मसीहा या मुजरिम ?

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Ali Aadil Khan Editor’s Desk

दिल्ली दंगों के पैरोकार अधिवक्ता महमूद पराचा के दफ्तर पर पुलिस Raid , कई खुलासे

फ़ैसला ज़ालिमों की हिमायत में जायेगा

ये हाल रहा तो कौन अदालत में आएगा

किसी भी देश की अदालतों का गठन अपराधियों को सजा और पीड़ितों को इन्साफ दिलाने  के लिए ही किया जाता है , और इन्साफ किसी भी देश में तरक़्क़ी और अमन की राह को हमवार करने का सबसे मज़बूत जरिया होता है , लेकिन अगर अदालतों में हुक्मरान जमात , criminals या पैसे वालों का तसल्लुत और क़ब्ज़ा  होजाये तो फिर इंसाफ़ की उम्मीदें माँद पड़ जाती हैं , इसी को जंगल राज कहा जाता है  .

लेकिन दुनिया के हुक्मरान को याद रखना होगा

ज़ुल्म की टहनी कभी फलती नहीं ,

नाँव कभी काग़ज़ की चलती नहीं

इंसाफ़ का चलन रब की रज़ा का परवाना लाता है जबकि ना  इंसाफ़ी उसके ग़ज़ब को भड़काती है . दुनिया की तारिख शाहिद है जब भी दुनिया में मज़लूमों के साथ हुकूमत की हुकूमत की तरग से ना इंसाफ़ी हुई है तो फिर धरती पर केहत , सूखा और महामारी जैसी घटनाएं होती हैं जो आज पूरी दुनिया में देखने को मिल रहा है .और इस सबकी ज़िम्मेदारी हुकूमतों की होती है .

नार्थ ईस्ट दिल्ली के इलाक़े में फरवरी 2019 के दंगे में 53 लोग मारे गए थे  , 400 से ज्यादा लोग घायल शदीद घायल हुए थे . जिसमें से अधिकतर अल्पसंख्यक समुदाय से थे  ,भारी तादाद में दुकानों , मकानों और फैक्ट्रियों को आग लगाई गयी थी .इस दौरान दिल्ली पुलिस के जवान दंगाइयों का साथ देते vedios में दिखाई देरहे थे . उसके बाद से पुलिस की विश्वसनीयता और कार्यशैली शक के दायरे में आ गयी थी .

इसके प्रतिरोध में बहुसंख्यक समुदाय का भी नुकसान हुआ .और फिर जिस तरह से प्रत्यक्ष प्रमाण के बावजूद पीड़ितों की FIR नहीं लिखी गयी , उसके बाद वो शक विश्वास में बदल गया था की पुलिस पूर्वग्रह से ग्रस्त है जिसका ज़िक्र दिल्ली की अदालत के  नयायधीश ने भी किया है .

आम आदमी पार्टी के राजयसभा सांसद संजय सिंह ने पार्लियामेंट में कहा था की दिल्ली दंगे बीजेपी ने सुनियोजित तरीके से कराये हैं , अगर ऐसा नहीं है तो संजय सिंह पर ग़लत बयानी करने और झूठे इलज़ाम के आरोप में उनके ख़िलाफ़ मुक़द्दमात क्यों नहीं चलाये गए ? इसका मतलब सांसद संजय सिंह का दावा सच्चा है , और अगर वो सच्चे हैं तो जिन आधारों पर वो दंगों को बीजेपी की साज़िश बता रहे हैं उसके आधार पर पूरे मामले की तहक़ीक़ की जाए और इन्साफ किया जाए .

नफ़रत की सियासत ने  40 मुस्लिम जानो के साथ 13 हिन्दू जानो की भी बलि दी , कब तक नफरत के सौदागर इस तरह हिन्दुओं ,मुसलमानो और दुसरे मज़ाहिब व् जातियों के बेगुनाहों को बलि का बकरा बनाते रहेंगे ? अगर थोड़ी भी इंसानियत बची हो तो सोचो जो घर बर्बाद हुए हैं उनकी आह आसमानो से  तुम्हारे लिए क्या लेकर लौटेगी ?

जिनके सुहाग उजड़ते हैं  , मांगे सूनी होती है  जिनकी गोद वीरान होती है या जिनका साया छिनता है उनकी आह खाली नहीं जाती , जिसपर भी विश्वास रखते हो उसका तुमको वास्ता , अपनी नस्लों पर रेहम खाओ , खुद अपने पर रेहम खाओ और बाज़ आओ नफ़रत और ज़ुल्म की इस सियासत से .वरना कई  ज़ालिमों को तुमने भी देखा होगा सिसकते हुए , रेहम की भीक मांगते हुए …… 

दर्जनों facts finding agencies की रिपोर्ट्स में इन दंगों को सुनियोजित बताया गया , एक तरफ़ा कार्रवाई बताया गया था , आम आदमी पार्टी के राज्ये सभा सांसद संजय सिंह ने खुले आम दिल्ली दंगों के पीछे बीजेपी का हाथ बताया था और अब दिल्ली दंगों की क़ानूनी लड़ाई में रफ़्ता रफ़्ता सच्चाई सामने आने लगी थी , कि अचानक सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और दिल्ली दंगों के Victims और पीड़ितों की पैरवी कर रहे मेहमूद पराचा के दफ्तर पर दिल्ली पुलिस की Special Cell की टीम द्वारा Search Operation किया जाना संजय सिंह के बयान को शक्ति देता है .

महमूद पराचा के अनुसार दिल्ली दंगों की योजना के तार सत्ताधारी पार्टी के आला नेताओं तक पहुँचने वाले हैं .इसी बीच अचानक पराचा के Office में virchual hearing के दौरान उनके दफ्तर में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल Raid हुई  , जो दोपहर 12 : 30 PM से शुरू होकर मध्य रात्रि 2 : 30 AM लगभग 14 घंटे तक चली  , Special cell की टीम के साथ 2 Laptop एक Printer और २ बैग्स में Electronic devices थीं .

मेहमूद पराचा का कहना है की वो उनके records को नष्ट करना चाहते थे , उनके बेहद क़ीमती दस्तावेज़ों को नष्ट करना चाहते थे या चुराना चाहते थे या साथ ले जाना चाहते थे  , जो मैं यानी  (Adv . महमूद पराचा ) अपना फ़र्ज़ समझकर उनकी हिफ़ाज़त और संविधान की हिफाज़त में अपनी जान की क़ुरबानी देने तक को तैयार था और हूँ   .

मेहमूद पराचा का कहना था कि स्पेशल सेल कि टीम के पास सर्च आर्डर में कंप्यूटर और दस्तावेज़ों को छानने या लेजाने या हार्ड disk Snetch करके लेजाने का कोई अधिकार नहीं था , लेकिन वो यानी महमूद पराचा फिर भी संविधान के रक्षक के सिपाही की हैसियत से Special Cell की टीम को सहयोग दे रहे थे .

साथ ही SC वरिष्ठ अधिवक्ता मेहमूद प्राचा अपने स्टाफ तथा समर्थकों और मीडिया के साथियों को संयम  बरतने की बात कर रहे थे और इस कार्रवाई में कोई विघ्न न डालने का आग्रह करते रहे , स्पेशल सेल कि टीम जो Sun Light में सर्चिंग का आर्डर लाई थी वो टीम अपनी कार्रवाई को मध्य रात्रि के 2 : 30 बजे तक करती रही  .

इस बीच जो ख़ास बात अधिवक्ता महमूद पराचा ने बताई वो यह थी की Special Cell की टीम बार बार अमित शाह का नाम ले रही थी , justice लाया की बात कर रही थी , और बेबुनियाद मुक़द्दमात थोपने की बात कर रहे थे वो लोग  

हालाँकि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 126 से 129 पर नज़र डालें तो यह किसी भी Advocate के  Clients के साथ संचार के संबंध में कानूनी चिकित्सकों को विशेषाधिकार प्रदान करता है।जिसका उल्लंघन खुद एक अपराध है मेहमूद पराचा का कहना है वो लगातार असंवैधानिक और गैर क़ानूनी दबाव बनाने में लगे थे .

न्याय वितरण प्रणाली के दो मुख्य संस्थाओं Advocacy और Policing के बीच जो आपसी सामंजस्य और सौहार्द की Understanding है  Advocate प्राचा के वर्तमान मामले में इसका पालन नहीं किया गया है।बल्कि उसकी मज़ाक़ बनाई गयी . हालांकि, इस पूरे मामले के बहुत से पहलु हैं जिनपर हम नहीं जाना चाहते हैं, जाहिर है कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई क़ानूनी पहलुओं से बज़ाहिर कमज़ोर नज़र आती है , जो कि एक बहुत ही गंभीर मामला है .यह अलग बात है की ….

जहां तक अधिवक्ता बरादरी का संबंध है, उसमें इंतहाई ग़म और ग़ुस्सा पाया जा रहा है हमने क़ानून के कई दिग्गजों से इसमें बात की उनका कहना था की यह वाक़िया देश में न्याय प्रणाली को कमज़ोर बनाता है , संविधान और लोकतंत्र की गरिमा को कमज़ोर करता है जो हम नहीं होने देंगे .और वक़्त पड़ने पर इसका संवैधानिक जवाब दिया जाएगा .

उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़

हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा 

हम बतादें कि दिल्ली बार कौंसिल की ओर से अधिवक्ता और Delhi Bar Council (DBC) के Vice Chairman हिमाल अख्तर , पूर्व Chairman KC मित्तल और राजीव  खोसला Member BCD ने ग्रह मंत्री को लेटर लिखकर इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने को कहा है .BCI के भी पूर्व पदाधिकारियों ने इस  मामले को अधिवक्ता बरादरी के लिए अपमान जनक साज़िश बताया है जिसका वक़्त पड़ने पर जवाब देने की भी बात कही गयी है .

मेहमूद पराचा की दर्ख्वस्त पर दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के Duty Magistrate ने  27 दिसंबर को सुनवाई करते हुए , Applicant को vedio footage ज़रुरत पड़ने पर देने की बात कही  साथ ही 5 जनवरी को Investigating Officer को कोर्ट में उपस्थित रहने का भी आदेश जारी किया  .

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