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आगामी चुनाव के राजनितिक दंगल में किसका चलेगा धोबी पाट

Ali Aadil khan

Ali Aadil Khan Editor's Desk

देश की युवा शक्ति युवा नेताओं के चयन में अपनी भूमिका कितनी निभा पा रहे हैं इसका अभी आंकलन मुश्किल है किन्तु उत्तर प्रदेशं में अखिलेश के साथ युवाओं का ज़रूर सहयोग दिखाई दिया संयोग से राज्ये में युवा विधायकों की भी अच्छी तादाद है ।मुलायम सिंह के साथ युवा शक्ति तो बिलकुल नहीं बल्कि बुज़ुर्ग नेताओं का भी अकाल रहा है ।राज्ये में राजनितिक दंगल के मुलायम अगर पहलवान हैं तो बेटे के पास भी कई दांव मौजूद हैं और वो बार बार पिता  के सभी दांव काट देते हैं आखिर उनके साथ पुराने उस्ताद जो हैं जो हर दांव से पहले उसका काट सोच लेते हैं , वेसे भी अखिलेश को राज्ये में विकास के नाम पर जाना जाता है ।UP में पारिवारिक झगडे में किसको  कितना नफा होगा और कितना नुकसान  इसपर हमारा मानना है की चुनाव आयोग द्वारा  यूपी सहित पांच राज्यों में चुनावी  तारीखों का ऐलान कर यूपी में विधानसभा का सत्र बुलाए जाने पर संवैधानिक रोक तो लगा ही दी साथ ही मुलायम -अखिलेश के नाटकीय विवाद को भी विराम लग सकता है,यदि UP में विधान सभा सत्र बुलाया जाता तो यक़ीनन इससे सपा का अंतरकलह बढ़ सकता था ,हालांकि अखिलेश के बाज़ी मार ले जाने की वहां भी पूरी उम्मीद थी ।

 

3  माह से चले आ रहे इस विवाद से  एसपी का वोटर ख़ास तौर से मुस्लिम वोटर काफी Confuse हुआ है जिसका लाभ बसपा को होसकता है ।दुसरे, मुस्लिम वोट के बटवारे से दूसरा बड़ा लाभ बीजेपी को होना भी तय है ,जबकि आरएसएस के मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने प्रदेश में मुस्लिम वोटर को लुभाने की प्रकिर्या भी शुरू करदी है जिसके बाद बीजेपी को भी कुछ मुस्लिम वोट जाने की उम्मीद जताई जा रही है .  कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है की राज्ये में 22 % दलित और 18 % मुस्लिम मिल  जाएँ  तो  ये  कुल  40% होजाता  है  जिसके   बाद  बसपा की जीत पक्की  होजाती है , माना जाता है की 28 % वोट जिस पार्टी को मिलता है उसी का मुख्यमंत्री बनता है ऐसे में यदि मुस्लिम वोट का बटवारा  होता है और  40-40 % सपा  और  बसपा  को जाता  है  तो भी बसपा की पूर्ण बहुमत के साथ जीत पक्की है ।यानी  22 %+7.5 %=29 .5 %,जो  जीत  के  जादुई  आंकड़े  28% से  अधिक  है .

 

याद दिला दें की मायावती के द्वारा लोक सभा चुनाव के दौरान मेरठ में दिए गए ब्यान को भी मुस्लिम वोटर गंभीरता से ले रहा है जिसमें उन्होंने मुसलमान के मुक़ाबले सांप्रदायिक कही जाने वाली बीजेपी को सपोर्ट करने को बल दिया था ।लेकिन आज के हालात में मुस्लिम वोटर इसको कितनी एहमियत देगा यह देखना अभी बाक़ी है ।अभी एक आशंका और नज़र आती है ,UP विधान सभा में बहुमत की अनिश्चितता के आधार पर बीजेपी राष्ट्रपति शासन की मांग कर रणनीतिक बढत की तिकडम लगा सकती है ।इस राजनैतिक दंगल में कौन किसको मारेगा धोबी पाट इसके लिए इंतज़ार करना होगा 11 मार्च का जब नतीजों का होगा ऐलान ।।

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