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क़ौमों की हयात इल्म की बक़ा में है मुज़्मिर

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क़ौमों की हयात इल्म की बक़ा में मुज़्मिर

बिला तफ़रीक़ इल्म को फेलाया जाए,यही समाज की खुश हाली का है आधार

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना |
हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा ||

जिस क़ौम में इल्म के हासिल करने या उसको फेलाने का शौक़ आजाता तो दोहरी कामयाबी इसका मुक़ददर बन जाती है। फना होने वाली दुनिया की इजज़त और ला फानी और अब्दी जिंदगी यानी आखिरत की ला ज़वाल कामयाबी।

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अब फैसला आपका,आपको तालीम याफ्ता तेह्ज़ीब का पैकर बनकर जिंदगी गुज़ार्नी है या मजदूर और गुलाम क़ौमों की तरह ज़लील समाज का हिस्सा बनना है।हमारी एक छोटी सी कोशिश है अगर आप इसमें अपना हिस्सा रखना चाहें तो खुश आम्दीद और अगर तमाशायी की हैसियत में रहना चाहें वो आपकी वो भी आपकी मर्जी ।

फिलहाल एक खुशी का मौक़ा था सोचा आपके साथ साझा कर लूं ,ताकि मुख्लिस खुशी का इज़हार कर सकें और क़ौम के गय्यूर दानिश्वर और क़ौम के हमदर्द हमारी कोशिश के मआविन बन सकें।

अल-हफीज़ एजुकेशनल एकेडमी, सहसवान में बच्चों ने किया इजतमाई (सामूहिक) इफ़्तार  का एह्तमाम किया आैर इदारे के १० वीं कक्षा में शत प्रतिशत रिज़ल्ट रहने पर क्षात्रों को किया सम्मानित भी किया गया।

रमजा़न के मुबारक मौक़े पर अल-हफीज़ एजुकेशनल एकैडमी में बच्चों ने सामूहिक इफ्तार पार्टी का आयोजन किया जिसमें मुस्लिम बच्चों के साथ उनके हिंदू दोस्तों ने भी इफ़्तार किया तथा मानव एकता एवं भाईचारे का परिचय दिया |जो हमारे मुल्क का सरमाया है।

इस आयोजन ने समाज को एक दिशा भी दी और बताया की सियासी पार्टियों से अच्छा है के विद्यार्थियों के साथ इस प्रकार के आयोजन किए जाएँ |इस से देश में मुहब्बत, प्यार और भाईचारा बढ़ेगा तथा नफ़रत और घ्रणा का माहोल समाप्त होगा|


१० वीं कक्षा में शत प्रतिशत रिज़ल्ट रहने पर प्राधानाचार्या ने क्षात्रों को ट्राफ़ी तथा मेडल पहना कर उनकी होसला अफ़ज़ाई की।

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खाक सार इसआयोजन पर प्रधानाचार्य, समस्त स्टाफ, बच्चों और अभिभावकों को मुबारकबाद देता हूं| यह आयोजन बच्चों में नैतिक मूल्य पैदा करते हैं| जिसकी देश को आज सबसे अधिक आवश्यकता है|

ग़ैर क़ौमें आपके अक़दार (सभ्यता) की परवाह क्यूँ करें जब आपको अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास नहीं, नस्ल साज़ी (generation development ) करनी है तौ इदारा साज़ी (institutional development ) करनी होगी।

इसी से ही क़ौम को मुख्य धारा में जौड़ने के साथ साथ अपने कल्चर व तेह्ज़ीब की भी पासबानी हो सकेगी। आइए हम सब मिलकर अपने अपने इलाक़ों में स्कूल या दीगर तालिमी इदारे बनाने का अहद करें। हमें बोलने, कहने, सुनने और लिखने से ज़्यादा, अल्लाह अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए (आमीन)

कलीमुल हफी़ज़
चैयरमेन-अल-हफीज़ एजुकेशनल एकेडमी सहसवान, बदायूँ (उ.प्र.)

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