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दुनिया में भुकमरी झेल रहे देशों में भारत का स्थान भी जान लो

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दुनिया में भुकमरी झेल रहे देशों में भारत का स्थान भी जान लो
पहला भाग 1

Ali Aadil khan Editor-in-chief///#bhukmari

दुनिया में भुखमरी बढ़ रही है। भूमंडलीय भुखमरी पर यूएन की ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है की भूखे लोगों की करीब 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। जबकि आजकल भारत की संसद में मज़हबी………..

संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि भूख की अत्यंत मार झेल रहे ये 11 ।3 करोड़ से ज्यादा लोग दुनिया के 53 देशों में फैले हैं। इस समस्या से सबसे ज्यादा अफ्रीकी महाद्वीप जूझ रहा है। युद्ध झेल रहे यमन, सीरिया, अफगानिस्तान और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो दुनिया के उन आठ देशों में शामिल हैं जहां भुखमरी झेल रहे इन लोगों में से दो तिहाई लोग रहते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) की सालाना रिपोर्ट में उन देशों की स्थिति का जायजा लिया जाता है, जो बेहद मुश्किल हालात से गुजर रहे हैं। एफएओ के आपात मामलों के निदेशक डोमिनिक बर्गन कहते हैं कि अफ्रीकी देशों में 7 ।2करोड़ लोग अत्यंत भुखमरी झेल रहे हैं। संकट और असुरक्षा इस समस्या की मुख्य वजह हैं। इसके अलावा आर्थिक संकट और जलवायु परिवर्तन की वजह से सूखे और बाढ़ जैसे हालात भी लोगों के मुंह से निवाला छीन रहे हैं।

ग्लोबल इंडेक्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत भुखमरी से निपटने में उत्तर कोरिया, बांग्लादेश और ईराक से भी पीछे है। इस साल भारत को 100वां स्थान मिला है। पिछले साल वह 97वें स्थान पर था। वर्ल्ड सस्टेनेबल गैस्ट्रोनोमी डे यानी दुनिया भर में खाने को बर्बाद होने से बचाने के लिए मनाया जाने वाला दिन , इसी दिन एक रिपोर्ट publish हुई अकेले भारत में हर साल 6700 करोड़ किलो खाद्य सामग्री बर्बाद होती है। इसकी कीमत करीब 90 हजार करोड़ है।

यह अमीरों से बची हुई खाद्य सामग्री है गरीबी रेखा के नीचे रह रहे देश के 26 करोड़ लोगों का छह महीने तक पेट भर सकती है।इस सम्बन्ध में हम जल्द ही आपके सहयोग से भोज बैंक की शुरुआत करने जारहे हैं , जिसके toll free नंबर जारी किये जायेंगे जिसपर लोग अपने बचे खाने की जानकारी दे सकेंगे , और ज़रूरत मंदों तक वो खाना पहुँचाने का प्रबंध आपका भोज बैंक करेगा ।

पूरे एशिया में भारत की रैंकिग तीसरे सबसे खराब स्थान पर है। आपको बता दें भारत से ज़्यादा खराब रैकिंग अफगानिस्तान और पाकिस्तान की है।जबकि ये देश खुद को एक ख़ास मज़हबी पहचान का झूठा दावा करते रहे हैं , अगर में साफ़ तौर पर कहूं तो पकिस्ता जिन बुन्यादों पर क़ायम हुआ था , अगर सच्चाई और ईमानदारी से वहां की सरकारें चलाई गई होतीं तो इन मुल्कों की तस्वीर कुछ और ही होती ,

भूख से निपटने में भारत अपने पड़ोसी देशों से काफी पीछे रह गया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन(29वें), नेपाल(72वें), म्यांमार(77वें), श्रीलंका(84वें) और बांग्लादेश(88वें) स्थान पर रहे।भारत के एक राज्य महाराष्ट्र की तस्वीर यह है कि मुंबई हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र की फड़नवीस सरकार को फटकार लगाते हुए कहा है कि वो कुपोषण को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं है. अदालत ने यह टिप्पणी डॉ अभय बंग द्वारा पेश एक रिपोर्ट पर की जिसमें यह कहा गया था कि राज्य में कुपोषण से हर साल 11,000 लोगों की मौत हो जाती है.

कई साल से गृह युद्ध झेल रहा यमन भूख की समस्या के सबसे ज्यादा शिकार देशों की सूची में छठे स्थान पर है। पिछले साल से इसकी स्थिति जरा भी नहीं बदली है। इसको हम दोहरा देते हैं यमन ग्रह युद्ध का शिकार है ,आपको बता दें भारत में भी कई बार ग्रह युद्ध की भविष्वाणी कई सियासी पंडित करते रहे हैं , देखना यह होगा की भारत यदि ग्रह युद्ध का शिकार होता है तो इसका यानी भारत का भुकमरी की लेन में नंबर कहाँ आजायेगा ?

क्या हम या हमारी सरकारें इस रहस्य को जानने की कोशिश नहीं करेंगे की ग्रह युद्ध से फायदा किसका होगा और कौन इस दलदल में फसाने की योजना बनाकर मुल्कों की सरकारों को देता है , ज़ाहिर है ये वही क़ौम है जो दुनिया को अपने ढंग से चलाने के लिए new world order की योजना पर काम कर रही है ।

हमारा देश विकास की जिस राह पर चलकर आज दुनिया के विकास शील देशों की सूची में जो पहुंचा है इसके पीछे एक बड़ा कारन अनेकता में एकता के फॉर्मूले पर चलते हुए ही मुमकिन होपाया है , लेकिन किसी भी देश की तरक़्क़ी New world Order फॉर्मूले पर अमल करने और मसीही दज्जाल का का इंतज़ार करने वालों को हरगिज़ नहीं भाति है , पूरे विश्व में अराजकता और अस्थिरता बनाये रखना जिस क़ौम की ज़िंदगी का मक़सद हो भला वो कैसे मुल्कों का भला सोच सकती है ,

ये वही क़ौम है जो हज़ारों इंसानो का क़त्ल करके माफ़ी मांग लेती है और कहती है हमको रिपोर्ट ग़लत दी गई और दुनिया फ़ौरन माफ़ भी करदेती है इराक और अफ़ग़ानिस्तान उसकी ज़िंदा मिसाल हैं , हम जिस क़ौम की बात कर रहे हैं आप समझ गए होंगे , यह वही क़ौम है जो मस्नूई सेल्फ मेड भूकंप और वर्षा करके हज़ारों लोगों की जान ले लेती है Restorage या रिहैबिलिटेशन के नाम पर करोड़ो डॉलर कमाकर अपनी अर्थ वयवस्था को भी मज़बूत बनाये रखती है ।

दुनिया में भुखमरी बढ़ रही है। भूमंडलीय भुखमरी पर यूएन की ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है की भूखे लोगों की करीब 23 फीसदी आबादी भारत में रहती है। जबकि आजकल भारत की संसद में मज़हबी नारों की गूँज में देश में भूक से बिलेकते करोड़ों लोगों और हालिया दिनों में अस्पतालों में मरने वालों के परिवार जनों की चीखों को दबा दिया गया है , और साथ ही तीन तलाक़ जैसे फ़ुज़ूल मुद्दों को बहस का issue बनाया गया है , मानो तीन तलाक़ का बिल अलादीन का चिराग़ हो इसके आते ही देश में जल संकट , भुकमरी , कुपोषण , बेरोज़गारी , अकाल , और कृषि , स्वास्थ्य , सामाजिक सुरक्षा तथा शिक्षा जैसे एहम मुद्दे सब हल होजाएंगे ,

 

भुखमरी पर अपनी तरह की इस पहली रिपोर्ट “स्टेट ऑफ फूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रीशन इन द वर्ल्ड, 2017” में बताया गया है कि कुपोषित लोगों की संख्या 2015 में करीब 78 करोड़ थी तो 2016 में यह बढ़कर साढ़े 81 करोड़ हो गयी है। हालांकि सन 2000 के 90 करोड़ के आंकड़े से यह अभी कम है लेकिन लगता है कि आगे बढ़ने के बजाय मानव संसाधन की हिफाजत के पैमाने पर दुनिया पीछे ही खिसक रही है। कुल आबादी के लिहाज से देखें तो एशिया महाद्वीप में भुखमरी सबसे ज्यादा है और उसके बाद अफ्रीका और लातिन अमेरिका का नंबर आता है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट भुखमरी के कारणों में युद्ध, संघर्ष, हिंसा, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदा आदि की तो बात करती है लेकिन साम्राज्यवाद, उदारवाद, पूंजीवाद , धार्मिक पाखंडवाद , भ्रष्टाचार , सरकारी बोगस आर्थिक नीतियां , अर्थव्यवस्था और बाजार का ढांचा भी एक बड़ा कारण है , इसकी तरफ ध्यान आकर्षित नहीं करती । लेकिन यहाँ एक सवाल पैदा होता है की दिनिया में कुपोषण और भुकमरी की रिपोर्ट पेश करने वाला UN का सुप्रीमो अमेरिका ,दुनिया की आर्थिक , सामाजिक , शैक्षिक , और पर्यावरण जैसे सहनशील मुद्दों पर ऐसे ही युद्ध स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जैसे जापान के नागासाकी हिरोशिमा पर बमबारी , इराक , अफ़ग़निस्ता , सीरिया , लेबनान ,गल्फ वॉर , वेतनाम वॉर जैसी दर्जनों जंगों में अपनी फौजें उतार कर की गयी थीं ? जिसका मक़सद जंग हो वो अम्न और विकास की बात क्योंकर करेगा ।

इसकी बड़ी वजह दुनिया से इन्साफ और समानता तथा हक़ का मिट जाना है ।

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