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चीनी राष्ट्रपति की अनौपचारिक भारत यात्रा का क्या है मतलब?

चीनी राष्ट्रपति की अनौपचारिक भारत यात्रा का क्या है मतलब?

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चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को PM मोदी ने महाबलीपुरम में अर्जुन की तपस्या स्थली के दर्शन कराये

अरब नेताओं के स्वागत में जिस तरह मोदी का अंदाज़ था वो चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के वक़्त नहीं दिखा , क्यों?

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) की आज से दो दिनों की अनौपचारिक यात्रा आरम्भ ,जिनपिंग के भारत दौरे का अभी तक नहीं है खुलासा ,लेकिन दोनों देशों के बीच कशीदगी दूर करने का यही है माध्यम

नई दिल्ली : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) आज से दो दिनों के भारत दौरे पर हैं। चेन्नई पहुंचने पर उनका परंपरागत तरीक़े से स्वागत किया गया। प्रधान मंत्री चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए तमिलनाडु में पहले से उपस्थित रहे , मगर मोदी ने जिस प्रकार अरब नेताओं के आगमन पर गरम जोशी और नम्रता दिखाई थी वो आज शी के आगमन पर नहीं दिखी ,इसका कारण शायद मोदी जी भी नहीं बताएँगे ।

इस अनौपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग महाबलीपुरम पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी इस मौक़े पर दक्षिण के पारम्परिक ड्रेस कोड में नज़र आए। पीएम मोदी ने शी चिनफिंग को अर्जुन की तपस्या स्थली, पंच रथ, शोर टेंपल समेत अन्य स्थानों को दिखाया और इसके बारे में जानकारी दी। अब इसमें जिनपिंग की रूचि कितनी थी यह भी नहीं पता ।

दरअसल अनौपचारिक बैठकों के बाद न कोई संयुक्‍त घोषणापत्र जारी किया जाता है और न ही औपचारिक बयान जारी होते हैं। ऐसे में अनौपचारिक मुलाकातों का सबसे बड़ा संकट यही है कि इसमें बैठक के वास्‍तविक नतीजों का पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है।

 

बता दें कि चिनफिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरी अनौपचारिक शिखर वार्ता के लिए करीब 24 घंटे की भारत यात्रा पर आये हैं। तमिलनाडु से करीब 50 किलोमीटर दूर पुरातनकालीन तटीय शहर मामल्लापुरम में यह शिखर वार्ता होगी जो चीन के फुजियान प्रांत के साथ मजबूत व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों के कारण अहम है।

चिनफिंग के साथ विदेश मंत्री वांग यी और चीन के स्टेट काउंसिलर यांग जियेची भी आए हैं। दोनों ही भारत में अपने समकक्षों विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ अलग-अलग बातचीत कर सकते हैं। दोनों पक्षों के अधिकारियों ने कहा कि मोदी-शी शिखर वार्ता में मुख्य रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच द्विपक्षीय कारोबार तथा विकास सहयोग , कश्मीर मुद्दे पर मतभेदों तथा सीमा संबंधी जटिल विषय से अलग ले जाने पर ध्यान होगा। संबंधों में कड़वाहट के बावजूद चिनफिंग के स्वागत के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार ने काफी अच्छे इंतज़ाम किये हैं ।

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