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उत्तरी भारत में शाहीन की दस्तक

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उत्तरी भारत में शाहीन की दस्तक

शाहीन अकादमी दिल्ली का शुभारम्भ , उत्तरी भारत ख़ास तौर पर दिल्ली एवम NCR के छात्रों के लिए एक वरदान , दिल्ली के छात्रों में ख़ुशी की लहर

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा,
तेरे सामने आसमाँ और भी हैं।

नई दिल्ली :१३/०६/२०१९ ।special correspondent TOP News// किसी भी मुल्क या क़ौम की तरक़्क़ी का आधार उसकी तालीम पर होता है , बक़ौल किसी शेर के , हुसूले इल्म से ही क़ौम की तक़दीर बदलेगी- यही सच है फ़क़त तालीम से तस्वीर बदलेगी। भारत का साक्षरता प्रतिशत विकसित देशों के मुक़ाबले कम है ख़ास तौर पर उत्तरी भारत का साक्षरता रेट काफी कम है और इसमें भी मुस्लिम समाज निचले स्तर पर है ।

देश में अलग अलग समय और सरकारों के दौर में साक्षरता रेट का anupaat  इत्मीनान बख्श लेवल पर लाने की समय समय पर चर्चा तो होती रही और किसी हद तक अम्ल भी हुआ किन्तु , कामयाबी भी मिली मगर आज भी हम दुनिया के मुक़ाबले कामयाबी की दौड़ में पीछे ही हैं , मुख्यतय : देश का मुस्लिम समाज काफी पीछे रहा है या रखा गया है ।

 

लेकिन हर दौर में गाँधी , सर सय्यद , विवेकानद , मौलाना आज़ाद जैसे फ़िक्रमंद लोग पैदा होते रहे हैं उन्ही में एक नाम डॉ अब्दुल क़दीर साहब का भी है जो हैदराबाद के बीदर शहर से ताल्लुक़ रखते हैं ,और लगभग 30 वर्षों से तालीम के फ़रोग़ ख़ास तौर पर आला तालीमी फ़रोग़ के लिए अपनी कोशिशें करते रहे हैं , डॉ अब्दुल क़दीर ने शाहीन ग्रुप ऑफ़ इंस्टीटूशन्स की पूरे मुल्क में 40 से ज़यादा ब्रांच (शाखों ) की स्थापना की और तालीम के मैदान के शह सवार की हैसियत से मनाज़िल को तै किया , जिसके अब नतीजे भी आना शुरू होगये हैं ।और मुस्लिम समाज में भी उम्मीद की किरण जागी है , सर सय्यद के बाद अब कुछ तालीमी फ़रोग़ के दीवाने पैदा हुए हैं , जिनमें एक नाम इंजीनियर कलीमुल हफ़ीज़ उर्फ़ हिलाल का भी है ।

कालीमुल हफ़ीज़ Real estate और Architecture के मैदान में एक कामयाब कारोबारी की हैसियत से अपना मक़ाम बना चुके हैं और अब तालीम के मैदान में Al Hafeez Academy ,DWPS और Shaheen Academy जैसे इदारों में ज़िम्मेदार की हैसियत से अपनी खिदमात अंजाम दे रहे हैं ।

इसी ज़िम्न में 12 Jun 2019 को ओखला के अबुल फज़ल एन्क्लेव इलाक़े में शाहीन अकैडमी दिल्ली का इफ़्तिताह वजूद में आया , इफ़्तिताह में मारूफ़ Educationalist ,दिल्ली लोक सभा प्रत्याशी और मेंबर दिल्ली एजुकेशनल बोर्ड आतिशी मार्लीना ,शाहीन ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन्स, बीदर, कर्नाटक के चेयरमैन जनाब डा॰ अब्दुल क़दीर साहब ,ओखला के एमएलए तथा दिल्ली वक़्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खा़न , एकेडमिक डायरेक्टर जनाब वसीम जावेद , ज़कात फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन ज़फर मेहमूद ,शाहीन अकादमी दिल्ली के मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर कालीमुल हफ़ीज़ , राष्ट्रीय सहारा उर्दू के ग्रुप एडिटर मुशर्रफ़ आलम ज़ौकी़ शामिल रहे और मेहमानों ने ख़िताब भी किया। इस्लामी स्कॉलर डॉ0 सलमान असअद ने अकडेमी के इफ़तताही प्रोग्राम की निजा़मत के फ़राइज़ अंजाम दिये।

 

 

इलाक़े के सरकर्दा और मोअज़्ज़िज़ ने सख़्त गर्मी के बावजूद बड़ी तादाद में शरीक होकर तालीम की एहमियत में दिलचस्पी दिखाई ,और शाहीन अकादमी के क़याम को इलाक़े की फलाह और तरक़्क़ी के साथ मुल्क और मिल्लत के लिए इसको सरमाया बताया , साथ ही वहां मौजूद Academitians ने अपनी ख़िदमात देने का भी आश्वासन दिया ।

याद रहे भारत सरकार की साक्षरता अभियान , skill development , बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसी दर्जनों योजनाओं में शाहीन ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूट अपनी भागीदारी बड़ी ईमानदारी से निभा रहा है , यह कहा जा सकता है देश के साक्षरता और रोज़गार के मैदान में SGI का बड़ा किरदार उभर कर सामने आया है।

लेकिन अब देखना यह होगा की शाहीन अकादमी इस इदारे को दुसरे तालीमी और कोचिंग संस्थाओं की तरह वयवसाय या कारोबार से जोड़ता है या फिर यह क़ौम की कमज़ोर और ग़रीब तबके को आला तालीमी मैदान में तालीम के हुसूल के मौके फ़राहम करके हज़ारों ग़रीब परिवारों की दुआएं लेता है ।

हालाँकि यह भी सच है की क़ौमों की ख़िदमात गुज़ार इदारे अहल ए खैर और अहल ए वुसत (धन संपन्न ) लोगों के सहयोग से ही चला करते हैं , इसलिए अगर क़ौम के मसीहा और दानिश्वर तथा फिक्रमंद लोग इस तरह के इदारों को अपना सहयोग देते रहेंगे तो यक़ीनन ये इदारे आपके खुआब शर्मिंदा को ताबीर कर पाएंगे वर्ण एक रोज़ ये भी थक कर बैठ जायेंगे और फिर वही क़ौम ग़ुलामी के शिकंजे में फँसी रहेगी ।

तुझे किताब से मुमकिन नहीं फ़राग़ ,के तू  !
किताब खुवां है मगर साहिब ए किताब नहीं!!

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