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नए साल के शुरू में तलाक़ तलाक़ तलाक़ देते रहो जब तक ……

अली आदिल खान
एडिटर

तीन तलाक़ पर सजा का क़ानून बिल लोक सभा से पास होगया , अब यह राज्य सभा से गुज़रता हुआ सदर ए हिन्द के सामने पेश होकर क़ानून की शक्ल में आजायेगा . अगर नहीं आया तो क्या होगा कुछ नहीं ….क्योंकि यहाँ क़ानून बिकता है ..क़ानून अँधा भी है ,लेकिन किसी ख़ास ज़ात या क़ौम के नौजवानो को परेशां करना या मजबूर बनाना हो तो उसके लिए यह क़ानून वास्तव में क़ानून है ,..

 

तीन तलाक़ पर क़ानून का बिल कितना लाभ दायक होगा इसके नतीजे तो ३ साल बाद आने शुरू होंगे .काश देश में भीड़ के द्वारा मारे गए मर्दों कि बेवाओं या माओं के लिए इन्साफ का कोई क़ानून बना होता तो शायद पार्टी और साहिब के लिए ज़्यादा फायदेमंद होता , जो मुसलमान अपने रब के क़ानून को नहीं मानता वो सरकार के क़ानून को कैसे मान लेगा , होगा वही जो होना है अलबत्ता शरीयत में दखल का दरवाज़ा ज़रूर खुल सकता है, जिसके लिए शायद महिला को ही हमेशा कि तरह हरबा बनाया जाएगा ,

 

अब औरत से मुताल्लिक़ शरीयत का एक हुक्म यह भी है कि जो औरत अपने शोहर की इजाज़त के बिना बग़ैर ज़रुरत  घर से बाहर गयी तो उसने एक हराम काम किया तो क्या इस पर औरतों के खिलाफ सरकार कोई क़ानून बनाएगी  ?औरतों को सताने , परेशान करने या उनको टार्चर करने से मुताल्लिक़ पहले ही क़वानीन (laws)  मौजूद हैं मर्दों को सजा देने के लिए वही क़ानून काफी हैं .

 

ख़ास तौर से तलाक़ का नाम देकर बहसें करके , केस को संवेदनशील बनाकर इस तरह क़ानून बनाना सिर्फ साज़िश का नतीजा है .क़ानून  बनाना  है  तो नफरत के खिलाफ बनाओ , साम्प्रदायिकता के खिलाफ बनाओ ,भीड़तंत्र के खिलाफ बनाओ , साज़िशों के खिलाफ बनाओ ,शैतानत के खिलाफ बनाओ .ताकि अम्न आये शान्ति आये भाई चारा आये .देश की अर्थ व्यवस्था चरमरा रही है , बेरोज़गारी बढ़ रही है , किसान आत्म हत्याएं कररहा है , धार्मिक व जातीय भेद भाव बढ़ रहा है , दलित आदिवासी , अल्पसंख्यक  मर रहा है आप तीन तलाक़, गोहत्या , लव जिहाद , और एंटी रोमियो जैसे फालतू इश्यूज पर चर्चाएं करा रहे हो .कितना दुखद है यह सब .

 

देश में ऐसे लोग हुक्मरानी कररहे हैं जिनपर दर्जनों मुक़द्दमे चल रहे हैं ..और अब तो यह हो रहा है कल तक जो क़ानून की नज़र में मुजरिम थे आज  वो साहिब बने हुए हैं सत्ता की कुर्सी पर पहुंचे तो क़ानून साज़ एजेंसियों के बड़े बड़े ओहदेदार हाथ जोड़े खड़े होते हैं , आप जो चाहें करें आप तो साहिब हैं साहब !

 

चुनांचे उनको क्लीन चिट मिल गयी ..ये कौन लोग हैं जनता सब जानती है .मगर हमने ना तो शाह , न साहिब और न ही योगी किसी को भी मुजरिम नहीं बनाया है और हम होते भी कौन हैं मगर सच्चाई को सामने कौन लाएगा अगर हम भी चापलूस पत्रकार बन गए तो .. चलें थोड़ा आगे बढ़ें .

 

भ्रष्टाचार और नेताओं के काले करतूतों को सामने लाने वाले यहाँ तक की साहिब और शाह के अपराधों के खिलाफ जंग लड़ने वाले जांबाज़ अधिकारियों के नाम आपके सामने हम पेश करेंगे ये वो चंद अधिकारी हैं जिन्होंने फ़र्ज़ से समझौता किये बिना अपनी नौकरी, ऐश और फीता शाही सब दाव पर लगा दिया और कुछ अधिकारी आज भी जान हथेली पर रखकर सच्चाई और इन्साफ की आवाज़ को बुलंद करने में मसरूफ हैं

 

उनमें से कुछ के नाम यहाँ हम पेश कर रहे हैं सबके नहीं ,जैसे IPS अधिकारी संजीव भट्ट ,IPS  डी जी  वंजारा , समित  शर्मा  राजस्थान ,हर्ष  मंदर IAS गुजरात , ऋषि  कपूर अदाकार ,जी आर  खैरनार महाराष्ट्र ,Indian Engineering Service (IES) officer सत्येंद्र  दुबे ,मुकुल  सिन्हा ,राहुल  शर्मा पुलिस अफसर,सौरभ  कुमार सीनियर सुपरवाईज़र रेलवे , शबनम  हाश्मी समाज सेविका , राम पुनियानी राइटर ,रवीश कुमार पत्रकार ,विकास कुमार IPS राजस्थान ,रजनीश राय,नंदिता दास , NDMC लीगल अफसर एम् एम् खान,इसके अलावा दाभोलकर , कलबुर्गी , पानसरे , गोरी लंकेश की क़ुरबानी को कौन नहीं जानता .मध्य प्रदेश व्यापम घोटाले में जान गंवाने वाले पत्रकारों की क़ुर्बानी भी किसी से छुपी नहीं है .

 

चापलूस हुक्मरान इन्साफ और सच्चाई का भी गाला घूँटते हैं , अपने फ़र्ज़ के साथ देश से भी ग़द्दारी करते हैं .और देश में भ्रष्टाचार के पनपने की एक ख़ास वजह जो हमने महसूस की वो पुलिस , IB , CBI , जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण है .कई अफसरों ने हमको बताया की अगर हम इन्साफ और जाइज़ कार्रवाई करना भी चाहें तो नहीं करसकते फ़ौरन नेताओं , मंत्रियों और लोक सभा सदस्यों तथा विधायकों के फ़ोन आने लगते हैं . इसका मतलब है कि कहीं न कहीं अपराधियों पर सियासी छत्रछाया रहती है अक्सर बेगुनाह बलि के बकरा बन जाते हैं .

नए साल में देश की जनता और सभी सियासी पार्टियों के कार्येकर्ता , सत्ता धारी व विपक्ष के सभी नेता 26 जनवरी पर यह प्रण लें की हम देश से नफरत ,जातिवाद ,साम्प्रदायिकता , सामंतवाद ,पूँजीवाद , नस्ल परस्ती , द्वेष , हिंसा,छल कपट , ईर्ष्या ,भ्रष्टाचार , झूट , दग़ा ,भेदभाव और तमाम तरह की बुराइयों को तलाक़ देंगे .और यह तलाक़ जब तक देते रहेंगे जबतक हमारा समाज इन सब बुराइयों से पाक नहीं होजाता . आइये साहिब स्वच्छ अभियान की तरह नहीं ,पोलियो अभियान की तरह इस अभियान को भी अपनी योजना का हिस्सा बनायें और देश को सपनो का भारत बनायें नया भारत बनायें . Editor’s desk

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