Home » Editorial & Articles » अभी तो विकास का ही नारा अधूरा है…विनाश की ओर कहाँ चले

अभी तो विकास का ही नारा अधूरा है…विनाश की ओर कहाँ चले

मैँ ही गंगा मैँ जमना मैँ ही चम्बल का पानी हूँ।

मैँ ही दुर्गा मैँ ही रज़िया मैँ ही झांसी की रानी हूँ॥

मेरे सीने मैँ रहती हैं नमाज़ें और पूजा भी।

मेरी भाषा भी हिंदी है मैँ भी हिन्दोस्तानी हूँ॥

 

पाक में 2003 से 2016 तक 13 वर्षों में आतंकी हमलों में मरने वालों की  कुल संख्या 61,120 है ,जिनमें 33187 आतंकी ,6557 सिक्योरिटी के लोग तथा 21376 सिविलियंस मारे गए हैं ,जबकि भारत में 1984 से 2016 sep उडी तक 32 वर्षों में मरने वालों की संख्या 2160 है । अपने पाठकों को याद दिला दें की भारत में 1980 से 2015 तक होने वाले सांप्रदायिक दंगों में मरने वालों की संख्या 1,25,000  से ज़्यादा बताई जाती है ।ऊपर पाक में मारने वालों में आतंकियों की संख्या ज़्यादा है इसका मतलब आतंकी पाक सरकार के निशाने पर रहे हैं उनको वहां खुली छूट का आरोप इस आंकड़े से सिद्ध नहीं होता ,यहाँ हमको आंकलन यह करना है की दोनों ही देश एक दुसरे पर यह इलज़ाम लगाते रहे हैं की सभी आतंकी घटनाएं पडोसी  देश की ख़ुफ़िया एजेंसियां द्वारा घटित होती हैं , थोड़ी देर के लिए यदि दोनों देशों के इस तथ्य को मान भी लें तो पाक में ज़्यादातर हमले मस्जिदों ,स्कूलों या मॉल्स में हुए हैं जबकि भारत में आतंकी हमले ,संसद,लाल किला,एयर बेस ,आर्मी बेस तथा दुसरे सरकारी इमारतों में हुए हैं ,ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है की हमारा दुश्मन पडोसी इतना स्मार्ट और चुस्त है की वो वहां अटैक करता है जहाँ परिंदा भी पर  नहीं मारता की बात कही जाती है ।

hiroshima-1

मगर मुम्बई 2008 से हालिया उडी आर्मी कैंट पर आतंकी हमला हमारी सिक्योरिटी की कमज़ोरी को दर्शाता है , कहा यह भी जाता है की ये हमले देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए खुद सरकार कराती है , ताकि सरकारों की नाकामी पर पर्दा डाला जा सके राजनीतिज्ञों का मानना यह भी है की दोनों देशों में सियासत करने का सियासी जमातों का कश्मीर एक  मुदा है  कश्मीर मसला ख़तम होगा तो सियासी मुद्दा ख़त्म होगा जो पार्टियां नहीं चाहतीं , एक बात जो भिन्न है वो यह  की पाक में हमलावर और पीड़ित दोनों ही मुस्लिम्स होते हैं जबकि भारत में हमलावर मुस्लिम्स और पीड़ित हिन्दू होते हैं ।

hiroshima-2

इस पर ग़ौर करने की ज़रुरत है ,।यदि यह मान लिया जाए की पाक के इस्लामिक जिहादी ग्रुप्स वहां हमले करते हैं तो वो कैसे जिहादी हैं जो मस्जिद में नमाज़ीयों पर ही गोली चलाते हैं अगर इस्लामिक जिहादी हैं तो यहूदी, ईसाई या हिन्दू मज़हबी अड्डों को ख़तम करते मगर कभी ऐसा नहीं हुआ इसका मतलब मुस्लमान के भैस में मुस्लिम दुश्मन आतंकी हैं जो वहां के अमन को ख़त्म करना चाहते हैं या फिर सियासी जंग है जो सत्ता के लिए यह सब कराती है ।

कश्मीर को लेकर 65 वर्षों से होने वाली सत्ता और सियासी जंग की हद तक तो यह मुद्दा चल सकता है मगर दोनों देशों के बीच जंग का छिड़ जाना नागासाकी और हिरोशिमा की खौफनाक याद को ताज़ा करता है ,जैसा  की खतरा जताया जारहा है  की यदि हिन्द ओ पाक के बीच जंग शुरू होती है तो यह नुक्लेअर जंग में तब्दील होकर वर्ल्ड वॉर में बदल जायेगी जिसका नतीजा सिर्फ क़यामत ()होगी और सारी तरक़्क़ीयाँ और विकास बेमानी होकर रह जाएंगे ।

हर तरफ सन्नाटा पसरा होगा बरसों भी ज़मीन से इंसान के सड़े गोश्त की बदबू नहीं जायेगी ,आसमान पर दमकता सूरज तो होगा किन्तु ज़मीन पर सूरज का लुत्फ़ लेने वाले प्राणी नहीं होंगे ,बड़ी बड़ी इमारतें और चौड़ी चौड़ी रोड्स खाली पड़ी होंगी , खेत वीरान होंगे शहर सन्नाटे और खौफ का खामोश नाच देख रहे होंगे , ऐ तरक़्क़ी पसंद इन्साफ होश की दावा ले और समझ की तेरी मेहनतों का फल जो अब दिखाई देने को है तू इसको अपने ही हाथों तबाह करने जा रहा है  ।

hiroshima-3

नफरत  और जंग मसलों का हल नहीं होता तारीख ने यूरोप में होने वाली 2 बड़ी जंगों को देखा है ,नागासाकी और हिरोशिमा पर एटॉमिक हमले का असर आज भी इंसानियत के रोंगटे खड़े करदेता है ।इराक ,अफ़ग़ानिस्तान,लीबिया,श्याम,मिस्र और दीगर तरक़्क़ी पसंद देशों का हाल हमारे सामने  है  ,जिन देशों में लोग ऐश की ज़िंदगियाँ गुज़ार रहे थे आज उनकी ज़िन्दगियों में कराहट और दर्द के सिवा कुछ भी नहीं , वो रिफ्यूजी बने हुए हैं , अवाम दूसरों की रोटी की मोहताज है , मुल्क तबाही की निशाँ दही करते हैं ,क्या इन देशों से हमको सबक़ नहीं लेना चाहिए ?,न तो अवाम को बुनयादी सहूलत मिल पारही हैं और न ही हुक्मरान ही चैन की नींद सो पारहे हैं !

लिहाज़ा हिन्द ओ पाक को न्यूक्लियाई जंग   में धकेलने की बात करने वाले दोनों जानिब के हुक्मरान और अवाम होश की बात करें ,एक डेंगू  और चिकन गुनिया के वायरस ने तो अस्पतालों में जंग जैसे  हालात बना दी है जिस वक़्त नुक्लेअर और  एटॉमिक बम गिर रहे होंगे उस वक़्त सोचा है क्या हालात होगी हमारे अस्पतालों की ,अस्पताल ही शव गृह बन जाएंगे सोचा है कभी इसपर ,और सालों रेडिएशन्स अपना असर दिखाती रहेंगी, आने वाली  नस्लें  अपाहिज पैदा होंगी अपाहिज…., बहुत आसान है FB और ट्विटर पर फ़ुज़ूल की बातें करना ,एक दुसरे को गालियां देना ,नफरत और घृणा फेलाना  ,वक़्त तो ऐसा था की प्यार और मोहब्बत से ही फुरसत न मिलती , मगर  अफ़सोस……

…अब बात आती है देश की इज़्ज़त और शान की हमारे फौजियों के मान और सम्मान की ,तो वो तो पहले दिन ही फौजी देश की मर्यादा पर मर मिटने की सौगंध लेकर ही अगला क़दम उठाता है और उसके तईं वो वचन बद्ध रहता है तुम बताओ कितना देश से प्रेम करते हो कम से कम सरकारी स्कूल की दीवार की ईंटें ही अपने घर की चार दीवारों में न लगाओ सरकारी संपत्ति और टैक्स की चोरी ही न करो ,सरकारी बसों और रेल गाड़ियों को साफ़ सुथरा रखलो ,रेलवे स्टेशन्स और दीगर पब्लिक स्थानों पर तम्बाकू  की  लंबी  लंबी  पीकें मार मारकर गन्दा मत करो ,या कम से कम वृक्षों की ही रक्षा करलो,अगर लगा नहीं सकते तो बर्बाद भी मत करो अपने आस पास सफाई का ही ध्यान करलो , ये नहीं होगा बस पाक को सबक़ सिखादो मोदी जी , है न…. संयम और सब्र से काम लो वार्ना तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में ।editor,s desk ALi Aadil Khan

3 comments

  1. Janab, aapne jo baaten apne is article me kahin, aur sahi mudde + bharasht nafrat phailane wali sarkaro ke bare me logo ki ankhen kholne na shukriya

    afsos ke bade news channels in baaton ko promote nahi karte, kuch to hai jiski parda daari hai

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Scroll To Top